ACT OF GOD: यह पढ़ के आप भी कहोगे कि अर्थव्यवस्था की खराब हालत के पीछे भगवान का ही हाँथ है।

देश की GDP औंधे मुंह गिर गई है। जब गिरी उसके हिसाब से ‘गई थी’ लिखना चाहिए पर अब तक नहीं उठ पाई तो मजबूरन ‘गई है’ लिखना पड़ा। गाँव देश में कहावत है “एक तो तितलौकी दूजा नीम चढ़ी “,इसको चरितार्थ कर रही है देश की वर्तमान सरकार।देश की वित्त मंत्री पल्लू झाड़ के वित्तीय संकट का जिम्मा ACT OF GOD(CORONA VIRUS) पर डाल के ही खुश हैं। मने 6 साल से औंधे मुंह पड़ी अर्थव्यवस्था को पटक के ACT OF GOD चढ़े बैठा है। अगर सही में देश की इस हालत का जिम्मेदार ACT OF GOD है तो भाई दैवीय आपदा की परिभाषा या तो फिर से गढ़ी जाए या पुरानी के आधार पर किसी तरह इसको समझा जाए।तो हमने जोड़ते हुए समझने की कोशिस की है। इस बार GOD की जगह रखिये देश के वर्तमान सत्ताधीश को जिन्हें जनता ने चुना सेवक के तौर पर था, गलती से भगवान निकले।ऐसे में उनका और उनके सिपहसालारों का ACT हुआ ACT OF GOD,जैसे ही हमने ऐसा किया वित्त मंत्री जी की बात सही लगने लगी।फिर हमने निकाली ACT OF GOD की लिस्ट जो कुछ इस तरह क्रम से रूप बदलता हुआ अर्थव्यवस्था को नींबू समझ उसको निचोड़ के शिकंजी बनाने की कोशिस में लगा है ।

नम्बर एक: नोटबंदी- एक जेब फाड़ दैवीय आपदा

तारिख 08 नवम्बर 2016, शाम ढली तो सब ठीक था पर रात आयी तो अफरातफरी मच चुकी थी। दरसल शाम और रात के बीच 8 बजे GOD अवतरित हुए ACT OF GOD के लिए।बोले कमर कस लो नोट बदली जा रही है। जो अब तक कमाए और दबाये हो सब अमान्य हुआ आज से। जाओ बदल के नई लाओ। अब तक 1000 तक की ही नोट थी,अब 2000 की लाओ, अब अटैची में जितना भर के छुपाते थे उससे दूना छुपाओ। सब भक्त भागे बैंको के सामने नतमस्तक हो गए ,उनके खाली बटुये बिना आवाज की दस्तक हो गये।GOD बोले इससे काले धन का हिसाब भी होगा।जनता ठहरी मूर्ख समझी धन लौटा अगर काला तो उनके जीवन में आ जायेगा उजाला।हिसाब किताब बैठा तो पता चला कुल नोट का 1 प्रतिशत ही निकला काला और उससे ज्यादा खर्च बदलवाने में कर के भगवान ने निकलवा दिया था दिवाला।सब तो छोड़ो देश के पुराने भगवान हुआ करते थे, पहले वो देश में MIME(साइलेंट फॉर्म ऑफ़ एक्ट) OF GOD किया करते थे। वो तक इस तरह के भगवानों के सबसे बड़े मंदिर(संसद) में बोल पड़े “ये तो एक संगठित लूट है,दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है”। खैर GOD ने ये ACT OF GOD दिखाया और देश के 15 करोड़ मजदूरों का रोजगार छाती चौड़ी कर चबा के खाया।GDP की तो खटिया ही खड़ी कर दी।

नम्बर दो: GST- GOD ही समझें टैक्स

साल था 2017,काला धान लाये साल भर बीत चुका था , देश में व्यापार और कामगार कुछ ठीक महसूस करना शुरू ही कर पाए थे। लेकिन GOD ने अगली आकशवाणी कर दी ,खबर आई नया ACT OF GOD देश भर में रिलीज किया जायेगा। अबकी GOD ने बिना तैयारी के GST लगाने का फैसला लिया था। अबकी भी जनता रूपी भक्त नतमस्तक हुए बोले बोले प्रभु की जो आज्ञा।पर टैक्स का दांव पेच व्यापारियों के समझ ना आया वो बिना समय लिए चित हो कर गिर पड़े। देश में धंधा मंदा हो गया और GDP का हिसाब और भी गंदा हो गया।जब व्यापारी धन को तड़पे तो उन्होंने कामगारों के रोजगार हड़पे। लोग सड़कों पे आ गए, भगवान् फिर से सबको मुस्कुराते हुए रुला गए।

नंबर तीन: तालाबंदी- GO CORONA GO

वक्त बड़ी तेजी से धीरे धीरे गुजर रहा था।साल आ गया था 2020।अपने देश के एक पड़ोसी की तरफ से बुरी खबरें आनी शुरू हुई,कोई नया वायरस आ गया गया है। वैसे तो यह पड़ोसी अपने आप में ही दुनिया का सबसे बड़ा वायरस है। पर अबकी जो वायरस उसने दुनिया को दिया वह कहीं ज्यादा संक्रामक और आक्रामक था। उधर पूरी दुनिया डर गई ,इधर अपने देश में गाय माता वायरस और देश वासियों के बीच अड़ गई। पर वायरस था कहाँ मानता आया देश में और कहर ढाने लगा,अब हर कोई वायरस को ही भगवान बताने लगा। देश में कोरोना देवी/देवता की नई आरती भी बन गई।पर बात नहीं बनी।जब स्थिति हाँथ से निकलने लगी तो भगवान नींद से जागे और असली ACT OF GOD दिखाने के लिए झोला लेके भागे।बोले कोई बाहर जाए नहीं कोरोना को मुंह लगाए नहीं। पर सोचा नहीं की खाली पेट कोरोना से लड़ाई न होत गोपाला।God ने अचानक बिना प्लान के ताला बंद कर दिया रोज कमाने खाने वालों के मुंह का निवाला बंद कर दिया।बोले कोरोना से लड़ना है तो थोड़ा दर्द सहना है।भूखे प्यासे लोग निकले नंगे पाँव और भाग पड़े अपने गाँव।जबतक कुछ प्रभु को बुझाता कई घरों के दिये बुझ चुके थे।ठीक से होश आया तो करोड़ों बेरोजगार हो गए थे।जब GDP का आंकड़ा आया तब तो ACT OF GOD खुल के ही सामने आ गया।
तो कुछ इस तरह से अर्थव्यवस्था के बुरे हाल में ACT OF GOD का हाँथ हमें समझ में आया, बाकी जो आप को समझ में आये COMMENT में बताइये।

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