आरएसएस कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के भाषण पर आडवाणी ने तोड़ी चुप्पी, दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वार्षिक समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के शामिल होने को लेकर जो राजनीतिक घमासान शुरू हुआ था, वह समारोह खत्म होने के बाद भी जारी है। आरएसएस के समारोह में प्रणब के शामिल होने को लेकर अलग-अलग राजनैतिक वर्गों द्वारा अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। इस मुद्दे पर एक तरफ जहां कांग्रेस में आक्रोश दिखाई दे रहा है, वहीं बीजेपी और आरएसएस नेता इसको लेकर सकारात्मक रुख देते दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में अब बीजेपे के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी का बयान भी सामने आया है।

मिली जानकारी के अनुसार, आडवाणी ने अपने एक बयान में आरएसएस के इस समारोह में प्रणब मुखर्जी द्वारा दिया गए संबोधन की प्रशंसा की है और कहा कि जिस तरह से प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रवाद पर अपने विचार व्यक्त किये , इस तरह खुलेपन की भावना और आपसी सम्मान के साथ विचारों के आदान प्रदान से सहिष्णुता और सौहार्द की भावना तैयार करने में मदद मिलेगी।

आडवाणी ने कहा कि उनका मानना है कि प्रणब मुखर्जी और भागवत ने विचारधाराओं एवं मतभेदों से परे संवाद का सही अर्थो में सराहनीय उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि दोनों ने भारत में एकता के महत्व को रेखांकित किया जो बहुलतावाद समेत सभी तरह की विविधता को स्वीकार एवं सम्मान करती है। आडवाणी ने मोहन भागवत की ओर से वार्ता के माध्यम से देश के विभिन्न वर्गो तक पहुंच बनाने के प्रयासों की सराहना की।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस प्रकार खुलेपन की भावना और आपसी सम्मान के साथ विचारों के आदान प्रदान से सहिष्णुता, सौहार्द और सहयोग की भावना तैयार करने में मदद मिलेगी जो हमारे साझा सपनों के भारत के निर्माण में सहायक होगा।

प्रणब मुखर्जी की सराहना करते हुए आडवाणी ने कहा कि उन्होंने आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करके विनम्रता और सदाचार का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके लम्बे और व्यापक अनुभव ने उन्हें एक राजनेता बनाया है जो विभिन्न विचारधाराओं और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों के बीच चर्चा परिचर्चा एवं सहयोग की जरूरत को समझता है।

आडवाणी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ का पूरे भारत में विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि संवाद की भावना का सम्मान करते हुए आरएसएस राष्ट्र के कई वर्गों के साथ संबंध स्थापित कर रहा है, ये बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि खुले माहौल और आपसी सम्मान के माहौल में होने वाले ऐसे बातचीत से देश में सहिष्णुता सदभाव और सहयोग की भावना विकसित होगी।

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