आखिर क्या है बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर में सबसे खास, जानें

बाबा विश्वनाथ से गंगा के सीधे जुड़ाव के लिए एक पाइप लाइन बिछाई गई

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में कई खासियतें हैं लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि एक बार फिर बाबा विश्वनाथ और मां गंगा की दूरियों को घटा दिया है. काशी में ऐसा कहा जाता है कि विष्णुपगा गंगा कभी बाबा विश्वनाथ को छूते हुए प्रवाहित होती थीं लेकिन समय के साथ वे एक दूसरे से दूर हो गए. अब सदियों बाद यह फिर सच होने जा रहा है रु विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के दिन मां गंगा भी वहां नजर आने वाली हैं. मां गंगा अब मंदिर गर्भगृह में बाबा विश्वनाथ का पाद प्रक्षालन करेंगी.

गंगा के सीधे जुड़ाव के लिए पाइप लाइन

नए कॉरिडोर के प्लान के मुताबिक बाबा विश्वनाथ से गंगा के सीधे जुड़ाव के लिए एक पाइप लाइन बिछाई गई है. ये पाइपलाइन महाश्मशान मणिकर्णिका से सटे ललिता घाट से मंदिर के गर्भगृह तक बिछाई गई है. जल्द ही इस पाइप लाइन से गंगा जल सीधे बाबा के गर्भगृह तक पहुंचेगा. अब तक मंदिर के सेवादार ललिता घाट से गगरों में जल भर कर लाते हैं जो गर्भगृह के ऊपर बनी टंकी में डाला जाता है. एक पाइप लाइन से गंगा का जल बाबा के गर्भगृह तक आएगा जबकि दूसरी पाइप लाइन से गर्भगृह में चढ़ने वाला दूध और गंगाजल वापस गंगा में समाहित हो जाएगा. जल और दूध को गंगा तक पहुंचाने के लिए बिछाई गई पाइप लाइन का ट्रायल बुधवार को किया जा चुका है.

32 महीने में तैयार हुआ श्री काशी विश्वनाथ धाम

सन् 1669 में अहिल्याबाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनरोद्धार कराया था. उसके लगभग 350 वर्ष बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर के विस्तारीकरण और पुनरोद्धार के लिये 8 मार्च, 2019 को विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर का शिलान्यास किया था. शिलान्यास के लगभग 2 साल 8 महीने बाद इस ड्रीम प्रोजेक्ट के 95 प्रतिशत कार्य को पूरा कर लिया गया है. माना जा रहा है कि इस पूरे कॉरिडोर के निर्माण में 340 करोड़ रुपये ख़र्च हुए हैं. हालाँकि पूरे ख़र्च को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. पूरे कॉरिडोर को लगभग 50,000 वर्ग मीटर के एक बड़े परिसर में बनाया गया है. इसका मुख्य दरवाज़ा गंगा की तरफ़ ललिता घाट से होकर है.

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