आखिर क्यों 13 दिसंबर को भारत के इतिहास की काली तारीख माना जाता है?

नई दिल्ली: संसद पर हमले की आज 19वीं बरसी है। आज का दिन यानी कि 13 दिसंबर भारत के इतिहास की वो काली तारीख है। जिस दिन लोकतंत्र के मंदिर पर आतंकियों ने हमला बोल दिया था। आतंकियों के इस हमले में दिल्ली पुलिस के 6 जवान, संसद की सेवा में तैनात दो जवान और एक माली की मौत हो गई थी। हालांकि हमले में शामिल सभी आतंकियों को मार गिराया गया था। तो आइये जानते हैं विस्तार से पूरी घटना के बारे में…

तारीख 13 दिसंबर 2001

आज से 19 साल पहले यानी 13 दिसंबर 2001 को संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। संसद में पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामा चल रहा था। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई थी। तभी संसद के बाहर गोलियों की तड़तड़ाहट ने सिर्फ संसद को ही नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

हमले में 9 लोग हुए थे शहीद

19 साल पहले हुए इस हमले की याद आज भी ताजा है। जो हमें जागने को मजबूर करती है। आज ही के दिन एक सफेद एंबेस्डर कार में आए पांच आतंकवादियों ने 45 मिनट तक लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को गोलियों से छलनी कर दिया था। जिसके दाग आज भी हर हिंदुस्तानी के सीने में मौजूद हैं। आतंकियों की इस नापाक हरकत से संसद भवन के गार्ड, दिल्ली पुलिस के जवान समेत कुल 9 लोग शहीद हो गए थे।

सुरक्षाबलों ने सभी आतंकियों को मार गिराया

पाकिस्तान का आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकियों ने संसद भवन में घुसने की कोशिश की थी। लेकिन उनके मंसूबों पर देश के जांबाज सुरक्षाकर्मियों ने पानी फेर दिया और आतंकियों से डटकर सामना करते हुए हमले में शामिल सभी पांचों आतंकियों को मार गिराया।

प्रधानमंत्री समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने किया याद

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के हमले में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “हम 2001 में इस दिन अपनी संसद पर हुए कायरतापूर्ण हमले को कभी नहीं भूलेंगे। हम उन लोगों की वीरता और बलिदान को याद करते हैं जिन्होंने अपनी संसद की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाई। भारत हमेशा उनका शुक्रगुजार रहेगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह ने भी हमले में शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “2001 में लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन पर हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना सर्वोच्च न्योछावर करने वाले मां भारत के वीर सपूतों को कोटि-कोटि नमन करता हूं।”

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