पाकिस्तान बस कुछ हफ्तों में हो जाएगा कंगाल, इस बार चीन भी नहीं आएगा काम

नई दिल्ली। दूसरे देशों के नाक में दम बना हुआ पाकिस्‍तान इस बार अपने ही जाल में फंसता हुआ नजर आ रहा है। आपको बताते चले कि पाकिस्तान लगातार चीन से कर्ज ले रहा है औऱ यहां के राजनीतिक हालात भी ठीक नहीं है। सेना और सरकार के बीच खींचतान लगातार जारी है, जो कि देश के भविष्य के लिए एक बुरी बात साबित होगी।

मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी रुपये की वैल्‍यू इंटरनैशनल मार्केट में लगातार गिर रही है। 1 डॉलर के मुकाबले उसकी कीमत 120 रुपये तक गिर गई है। साथ ही पाकिस्‍तान में टूरिज्‍म में आई कमी की वजह से इंटरनैशनल करंसी का भंडार भी लगातार कम हो रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पास अब 10।3 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार है, जो पिछले साल मई में 16।4 अरब डॉलर था। लगातार कर्ज लेने की वजर से पाकिस्तान औऱ कर्ज में डूबता जा रहा है।

एक एजेंसी द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान का चीन और इसके बैंकों से इस वित्तीय वर्ष में लिया गया कर्ज करीब 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने के कगार पर है। इस बीच यह भी खबर है कि पाकिस्तान भुगतान संकट के चलते चीन से 1-2 बिलियन डॉलर (68- 135 अरब रुपए) का नया लोन लेने जा रहा है। वहीं एक दूसरी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पास जितानी विदेशी मुद्रा है वो 10 हफ़्तों की आयात के ही बराबर है। रिपोर्ट के अनुसार विदेशों में नौकरी कर रहे पाकिस्तानी देश में जो पैसे भेजते थे उसमें गिरावट आई है।

आपको बताते चले कि इन दिनों पाकिस्तान का आयात बढ़ा है और चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर में लगी कंपनियों को भारी भुगतान के कारण भी विदेशी मुद्रा भंडार ख़ाली हो रहा है। चाइना पाकिस्तान कॉरिडोर 60 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी परियोजना है। विश्व बैंक ने अक्तूबर महीने में पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि उसे क़र्ज़ भुगतान और करेंट अकाउंट घाटे को खत्‍म करने के लिए इस साल 17 अरब डॉलर की ज़रूरत पड़ेगी। पाकिस्‍तान विदेश में बसे अपने लोगों को ज्‍यादा पैसे भेजने के लिए खास ऑफर देने की भी तैयारी कर रहा है।पाकिस्तान का व्यापार घाटा भी लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्‍तान के एक्‍सपोर्ट में लगातार कमी आई है। पिछले साल पाकिस्तान का व्यापार घाटा 33 अरब डॉलर का रहा था। कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमत से पाकिस्‍तान को और ज्‍यादा आर्थ‍िक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

बता दें कि अमेरिका ने जब मदद बंद की तो चीन ने पाकिस्तान को सहारा दिया, जिसकी वजह से पाकिस्तान की निर्भरता चीन पर बढ़ी है। पाकिस्तान में जुलाई महीने में आम चुनाव होने वाले हैं और चुनाव के बाद पाकिस्तान 2013 के बाद दोबारा एक बार फ‍िर खुद को आर्थ‍िक संकट से उबारने के लिए आईएमएफ़ की शरण में जा सकता है। 2013 में पिछली बार IMF ने पाक की 6।7 बिलियन डॉलर की मदद की थी।

आपको बता दें कि पाकिस्‍तान में ज्‍यादातर लोग इनकम टैक्‍स भी नहीं देते हैं। 2007 में पाकिस्तान में इनकम टैक्‍स भरने वालों की संख्या 21 लाख थी जो 2017 में घटकर 12 लाख 60 हज़ार हो गई। पिछले काफी समय से पाकिस्तान देश हित में जो भी कदम उठा रहा है वह देश पर कोई खास असर नही डाल पाए है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले 10 हफ्ते में पाकिस्‍तान खुद को कंगाल होने से बचा पाएगा?

Related Articles