विकास दुबे के मौत के बाद उनकी माँ सरला देवी बोली-कुछ लेना देना नही था…. 

उत्तर प्रदेश:कानपुर का हत्याकांड में आरोपी कुख्यात बदमाश और आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपी विकास दुबे को एक यूपी पुलिस की एसटीएफ ने एक मुठभेड़ में मार गिराया है. बता दे की विकास दुबे के मरने की खबर जब उनकी मां सरला देवी को पता चली, तो उन्होंने मीडिया से दूरी बना ली और अपने आप को अपने घर में बंद कर लिया. यह भी कहा जा रहा है कि उनकी तबीयत भी बिगड़ गई है. जबकि इस बीच सरला देवी ने पुलिस से कहा कि बेटे विकास दुबे से उनका कुछ लेना-देना नहीं है.इसके साथ ही मां सरला देवी ने पुलिस से कहना है कि वो कानपुर नहीं जाना चाहती है. उन्होंने कहा कि वो लखनऊ में हैं और वहीं रहना चाहती हैं.सरला दुबे अपने दूसरे बेटे दीप प्रकाश की पत्नी के साथ लखनऊ में कृष्णा नगर के इंद्रलोक कॉलोनी में रहती हैं. विकास दुबे के एन्काउंटर में मारे जाने की खबर के बाद उनका बयान सामने आया है. उन्होंने पुलिस से कहा कि विकास दुबे से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

वहीं, एक दिन पहले विकास दुबे के पकड़े जाने पर उन्होंने कहा था कि सरकार जो ‘उचित’ समझे वह करे.मां सरला दुबे से जब पत्रकारों ने उनके पुत्र की गिरफ्तारी की बाबत पूछा तो उन्होंने कहा, ”सरकार जो उचित समझे वह करें, हमारे कहने से कुछ नहीं होगा. इतनी बड़ी सरकार, इस टाइम वह बीजेपी में है नहीं, वह सपा में है इस टाइम.” जब उनसे खासकर पूछा गया कि उनका बेटा दुबे किस पार्टी में है तो उन्होंने साफ साफ कहा कि वह सपा (समाजवादी पार्टी) में है. मां सरला से जब पूछा गया कि अब सरकार को क्या करना चाहियें तो उन्होंने कहा, ”हम क्या जाने क्या करना चाहिए.”

कौन था विकास दुबे
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे साल 2001 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला हत्याकांड का मुख्य आरोपी था. साल 2000 में कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कलेज के सहायक प्रबंधक सिद्घेश्वर पांडेय की हत्या में भी विकास दुबे का नाम आया था. कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र में ही साल 2000 में रामबाबू यादव की हत्या के मामले में विकास दुबे पर जेल के भीतर रहकर साजिश रचने का आरोप था.

साल 2004 में केबिल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या के मामले में भी विकास आरोपी था. 2001 में कानपुर देहात के शिवली थाने के अंदर घुस कर इंस्पेक्टर रूम में बैठे तत्कालीन श्रम संविदा बोर्ड के चौयरमेन, राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त बीजेपी नेता संतोष शुक्ल को गोलियों से भून दिया था. कोई गवाह न मिलने के कारण केस से बरी हो गया था.

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