शादी के बाद जबरन सेक्स या ओरल सेक्स करने को लेकर अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

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चंडीगढ़: शादी के बाद जबरन सेक्स करना या अप्राकृतिक संबंध बनाने के लिए बाधित करना अपराध की श्रेणी में आता है। इन अपराधों की वजह से कोई भी महिला तलाक ले सकती है। यह फैसला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बठिंडा की एक महिला द्वारा तलाक के लिए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। महिला ने पति पर गई गंभीर आरोप लगाए थे। अदालत ने महिला की तलाक की अर्जी भी स्वीकार कर ली है।

दरअसल, चार साल पहले निचली अदालत ने महिला की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इस मामले में महिला को यह साबित करना होगा कि उसके पति ने उसे साथ ओरल सेक्स या अप्राकृतिक सेक्स करने के लिए जबरदस्ती की थी। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह साबित नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसका कोई मेडिकल साक्ष्य मौजूद नहीं है।

इस मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब और हरियाणा की सबसे बड़ी अदालत के न्यायाधीश एमएम एस बेदी और जस्टिस हरिपाल वर्मा की खंडपीठ ने 1 जून को दिये अपने फैसले में कहा कि हमने पाया है कि याचिकाकर्ता महिला के दावे को गलत तरीके से ठुकरा दिया गया है। जबरन संबंध स्थापित करना और सेक्स के लिए अप्राकृतिक साधनों का इस्तेमाल जो कि दूसरे साथी पर जबरन किये जाते हैं-इससे इतनी पीड़ा होती है कि पीड़ित पक्ष अलग रहने के लिए मजबूर हो जाता है और ये तथ्य शादी को खत्म करने के लिए इजाजत मांगने का निश्चित रूप से एक आधार होगा।

अदालत ने अपने निष्कर्ष में पाया कि कोर्ट को ऐसे आरोपों को स्वीकार करने से पहले काफी सावधानीपूर्वक देखना चाहिए। अदालत की खंडपीठ ने कहा कि शादी को खत्म किया जा सकता है, यदि सबूतों या फिर हालातों के द्वारा ये प्रमाणित किया जा सके कि पति/पत्नी ने एक दूसरे के साथ अप्राकृतिक सेक्स किया है।

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