भोपाल मुठभेड़ कांड में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद मोदी सरकार और कांग्रेस में जंग

0

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल सिमी आतंकी मुठभेड़ कांड में केन्द्र व मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी किए जाने के बाद सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस ने जहां मुठभेड़ में कुछ गड़बड़ी होने की आशंका जताई है, वहीं सरकार ने न्यायिक जांच जारी होने का हवाला दिया है।

सिमी आतंकी

केंद्रीय कारागार में एक कर्मचारी की हत्या कर फरार हो गए थे

गौरतलब है कि दीपावली की रात सिमी के आठ कार्यकर्ता भोपाल के केंद्रीय कारागार में एक कर्मचारी की हत्या कर फरार हो गए थे। उन सभी आठों कार्यकर्ताओं को पुलिस ने अगले ही दिन मुठभेड़ में मार गिराया था। सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कार्यकर्ता के परिवार की ओर से मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र व राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उसी समय जांच सीबीआई को क्यों नहीं सौंपी गई? क्यों न अब जांच सीबीआई को सौंप दें।

नोटिस पर चार सप्ताह में सरकारों को जवाब देना है

इस नोटिस पर चार सप्ताह में सरकारों को जवाब देना है। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने संवाददाताओं से कहा, मुठभेड़ की जांच सीबीआई से ही करानी चाहिए थी, मगर दाल में कुछ काला है, इसीलिए सरकार सीबीआई जांच नहीं कराना चाहती।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है इसलिए जांच सीबीआई को सौंप देना चाहिए

अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है इसलिए जांच सीबीआई को सौंप देना चाहिए। वहीं राज्य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा, मुठभेड़ की न्यायिक जांच चल रही है, इसलिए उसे सीबीआई को नहीं सौंपा गया। जहां तक सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश की बात है तो वह नियमित प्रक्रिया है और सरकार अपना पक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सामने रखेगी।

कोर्ट की निगरानी में एसआइटी या सीबीआइ से मामले की जांच कराई जाए

बता दें हाईकोर्ट से मांग की गई थी कि वो गैर कानूनी मुठभेड़ के दोषियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दे। कोर्ट की निगरानी में एसआइटी या सीबीआइ से मामले की जांच कराई जाए। इतना ही नहीं मुठभेड़ में मारे गये लोगों द्वारा की गई हेड कांस्टेबिल की हत्या की जांच भी मध्य प्रदेश पुलिस के अलावा किसी और सक्षम अथारिटी से कराई जाए।

loading...
शेयर करें