कड़े संघर्ष के बाद वॉलीबाल गर्ल ‘रिया’ ने दुनिया में बढ़ाया देश का मान…

सगीर ए ख़ाकसार

अप्रत्याशित,अद्धभुत,और ऐतिहासिक सफलता हासिल कर उसने देश का मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है।उम्र उसकी भले ही कम हो,सपने उसके बड़े हैं।उसकी इस गौरवान्वित करने वाली कामयाबी पर ज़िले में जश्न का माहौल है।हर कोई उसकी तारीफ में कसीदे गढ़ रहा है।आननफानन जिले की तमाम संस्थाएं उसके उत्साह वर्धन एवं स्वागत के लिए आगे   आ गयी हैं। उसकी शानदार सफलता से उत्साहित स्थानीय लोग अब उसे ‘वॉलीबाल गर्ल’ के नाम से भी पुकारने लगे हैं।

जी हां!हम बात कर रहे बढ़नी की बेटी रिया की। जिसने 13 मई से 17 मई तक थाईलैंड  में सम्पन्न हुए साउथ ईस्ट एशियन महिला वॉलीबाल चैंपियनशिप  में  सब जूनियर महिला टीम से भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया है।

रिया जब 29 मई को अपने गृह नगर बढ़नी पहुँची तो लोगों ने अपनी बाहें फ़ैलादी ।उनके स्वागत के लिए नगर का हर तबक़ा उमड़ पड़ा।सभी उसकी इस  सफलता से गदगद थे।ढोल और नगाड़ों के बीच नगर वासियों ने जोरदार स्वागत कर ,रिया का हौसला बढ़ाया।

स्वागत एवं सम्मान समारोहों का सिलसिला शुरू हो गया।गृह जनपद के पहले आगमन पर जिला मुख्यायल पर जिला ओलम्पिक संघ और क्रीड़ा भारती ने रेलवे स्टेशन पहुंच कर शानदार ढंग से स्वागत किया और फूल ,मालाओं से लाद दिया।इसी क्रम में जिला मुख्यालय सिद्धार्थ नगर में 03 जून को जिला ओलम्पिक संघ के तत्वाधान में स्टेडियम के बहुउद्देशीय हाल में जोरदार स्वागत एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य अतिथि डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल रहे। श्री पाल ने ट्रॉफी और प्रशस्तिपत्र भी प्रदान किया।

जगदंबिका पाल ने कहा कि रिया का थाइलैंड में रजत पदक जीतना देश के लिए गौरव की बात है ।मेरी शुभकामना है कि रिया भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते।इस अवसर पर युवा खेल चेतना अवार्ड से सम्मानित मोहम्मद इब्राहिम ने सांसद से एन ई आर (गोरखपुर ) में महिला टीम के गठन की मांग की।जिससे उदीयमान बालिकाओं को टीम में शामिल कर उन्हें आगे बढ़ाया जा सके।बताते चले फिलवक्त एन ई आर गोरखुपर में सिर्फ पुरुष वर्ग की टीम का ही गठन किया गया है।

वॉलीबाल गर्ल रिया वॉलीबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया और स्कूल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित विभिन्न राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तरीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं। सन 2015 में वॉलीबाल  फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा तमिलनाडु के इरोड और कर्नाटक के बैंगलोर में मिनी नेशनल खेल चुकी हैं।

इसके अलावा 2016 और 17 में स्कूल गेम फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित यूपी अंडर 14 टीम से मध्य प्रदेश के खंडवा में  में अंडर 17 टीम में आंध्र प्रदेश में भी खेल चुकी हैं। वीएफआई द्वारा सन 2017 और 2018 में आयोजित सब जूनियर टीम से वो क्रमशः पांडिचेरी और राजस्थान में भी खेल चुकी हैं। भारत सरकार के खेलों इंडिया स्कूल गेम के तहत 2018 में नई दिल्ली में भी हिस्सा ले चुकी हैं।

रिया को भारत की सब जूनियर बालिका टीम में जाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा।सबसे पहले तो रिया ने अपनी प्रतिभा और संघर्ष के बल पर यूपी की टीम में जगह बनाई।तत्पश्चात नेशनल टीम में शामिल होने के लिए 18 फरवरी 2018 को राजस्थान के झुंझनु में नेशनल चैंपियनशिप में भाग लिया।इस दौरान रिया सहित 24 खिलाड़ियों का नेशनल कैम्प के लिए चयन हुआ। यहां से रिया का भारतीय टीम के लिए गहन प्रशिक्षण शुरू हुआ।

15 मार्च 2018 से 8 मई 2018 तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस संस्थान पटियाला, पंजाब में रिया ने गहन प्रशिक्षण के साथ वॉलीबाल की तकनीकी बारीकियों को सीखा,और बतौर सेटर खिलाड़ी उनका चयन भारतीय टीम में हुआ।कुल 12 खिलाड़ी चयनित हुए जिसमें यूपी की रिया श्रीवास्तवा और मेरठ की अनुष्ठा सिंह चयनित हुईं।

भारत नेपाल सीमा पर स्थित उपनगर बढ़नी ,जिला सिद्धार्थ नगर को काजल की कोठरी भी कहा जाता है।यहां बालक /बालिकाओं की शिक्षा और उच्च शिक्षा दोनों का अभाव है।खेल सुविधाएं तो न के बराबर है।तकनीकी शिक्षा की तो बात करनी ही बेमानी है। सुविधाओं से वंचित एक ऐसे छोटे से कस्बे बढ़नी  से  रिया श्रीवास्तव ने वो कर दिखाया जिसकी अपेक्षा शायद किसी को नहीं थी।वो एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं।

तीन भाइयों के बीच वो इकलौती बहन हैं। पिता अनिल श्रीवास्तव बढ़नी बस स्टॉप पर एक सहज सेवा केंद्र का संचालन करते हैं।मां प्रतिभा श्रीवास्तव एक साधारण गृहणी हैं।रिया श्रीवास्तवा फिलहाल वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कालेज गोरखपुर में इस वर्ष दसवीं की छात्रा हैं।उनकी प्राथमिक शिक्षा दुधवनिया बुज़ुर्ग के प्राथमिक स्कूल और स्थानीय दयाननद विद्यायल से हुई है।उन्हें वॉलीबाल खेल के लिए सबसे पहले जगृति स्पोर्टिंग क्लब के सचिव और यूपी वॉलीबाल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष मोहम्मद इब्राहिम ने प्रेरित किया।खेल में करियर और उज्जवल भविष्य की संभावनाओं से भी इब्राहिम ने ही रिया को परिचित कराया।

शुरुआती दिनों में रिया ने जगृति स्पोर्टिंग क्लब और जिला वॉलीबाल संघ के संयुक्त तत्वाधान में प्रत्येक वर्ष गर्मियों में आयोजित होने वाले वॉलीबाल समर कैंप में हिस्सा लेना शुरू किया। वॉलीबाल की बारीकियों और तकनीक को सीखना शुरू किया।मोहम्मद इब्राहिम कहते हैं कि रिया कैम्प में इकलौती  बच्ची थी बालकों के साथ समर कैंप में प्रैक्टिस करने आती थी।पिता अनिल श्रीवास्तव बेटी की इस कामयाबी पर बहुत खुश नजर आते हैं।

अनिल कहते हैं कि परिवार और रिश्तेदारों को भी बेटी का वॉलीबाल खेलना और बाहर निकलना अच्छा नहीं लगता था।तरह तरह के लोग मुझे उलाहने भी देते थे।लेकिन मैं कभी इससे विचलित नहीं हुआ।बेटी रिया को अपने ख्वाब पूरा करने का मैंने मौका दिया उसे आसमान में खुले पंख उड़ने की आज़ादी दी।

यूपी वॉलीबाल एसोसिएशन के महासचिव सुनील तिवारी कहते हैं देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है ,बस उन्हें उचित अवसर और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।बेटी रिया की सफलता से हम सब भी उत्साहित हैं उसने आने वाले खिलाड़ियों के लिए रास्ता साफ कर दिया है।एसोसिएशन के संयुक्त सचिव राजेश दुबे कहते हैं कि एक मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाली रिया के जुझारूपन और संघर्ष को हम सब सलाम करते हैं।उसका यह संघर्ष और जुझारूपन भावी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी साबित होगा।रिया का देश के लिए रजत जीतना हम सबके लिए सचमुच फख्र की बात है।

रिया के हिस्से में रजत पदक जीतने के अलावा और भी कई रिकॉर्ड है ।अव्वल तो यह कि वो सिद्धार्थ नगर से भारतीय महिला वॉलीबाल टीम का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली खिलाड़ी बन गयी है।इसके अलावा यूपी से पहली बार किसी खिलाड़ी का बतौर सेटर चयन हुआ है।

रिया श्रीवास्तव से उनके आवास पर मुलाकात हुई और लंबी बातचीत भी हुई।रिया कहती हैं कि जीवन एक संघर्ष है।पल पल ज़िन्दगी आपका इम्तेहान लेती है।मैं भाग्यशाली हूँ कि मुझे अपने वरिष्ठजनों और गुरुजनों का सदैव मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिला। जिससे मुझे जीवन की चुनौतियों से जूझने में मदद मिली।

वो अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता पिता और गुरुजनों को देते हुए कहती हैं कि बीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कालेज ,गोरखपुर के प्रिंसिपल ए के पांडेय और पूर्व प्रिंसिपल संतोष रावत,वॉलीबाल कोच रीवा शाही,सुरेंद्र सिंह,मुकेश सिंह,के योगदान को मैं नहीं भुला सकती।खेल भूषण से सम्मानित मोहम्मद इब्राहिम ने तो मुझे वॉलीबाल की दुनिया से रूबरू कराया ।उन्हीं की प्रेरणा से मैंने वॉलीबाल की दुनिया में कदम रखा।

उन्होंने कभी हतोसहित नहीं होने दिया ।हमेशा मेरा हौसला ही बढ़ाया।रिया कहती हैं अपने देश में प्रतिभाएं प्रायः सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ देती हैं।खेल को रोजगार और जीविकोपार्जन से जोड़ने की ज़रूरत है।इससे जीवन में सुरक्षा का बोध होता है।थाईलैंड में उनके अनुभवों के बारे में पूछने पर वो कहती हैं कि वहां कम उम्र से ही बच्चों का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है।वहां स्पोर्ट्स कालेज भी ज़्यादा  हैं,और आधुनिक साजसज्जा युक्त भी हैं।

खिलाड़ियों को उच्च नौकरियां भी दी जाती हैं।यह पूछे जाने पर कि अब आपका आगे का लक्ष्य क्या है ?सुश्री रिया कहती हैं मेरे सपना है कि मैं वॉलीबाल खेल की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाऊं और देश का नाम रोशन करूँ।एशियाड ओलम्पिक में खेल कर देश के लिए गोल्ड मैडल जीतूं।मैं जानती हूं यह इतना आसान भी नहीं है।लेकिन मुझे जूझना है।कड़ा संघर्ष करना है।अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते जाने है बिना रुके,बिना ठहरे,बिनाआराम किए।लक्ष्य को हासिल करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहना है।

वाकिफ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से
वो और थे जो हार गए आसमान से।

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