कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कोविड-19 के कारण हुआ निधन, गांधी परिवार के खास लोगों में से एक थे अहमद पटेल

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गांधी परिवार के बहुत ही करीबी कहे जाने वाले अहमद पटेल का बुधवार की सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर कोविड-19 के कारण निधन हो गया। अनके निधन की जानकारी बेटे फैजल अहमद ने ट्वीट कर दी। अहमद पटेल पिछले एक महीने से कोरोना वायरस के कारण बीमार चल रहे थे। अहमद पटेल के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था जिसके कारण आज सुबह उनका निधन हो गया। इनका इलाज गुरूग्रंम के मेदांता मे चल रहा था।

पांच बार राज्यसभा और तीन बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं अहमद पटेल

कांग्रेस के करीबी कहे जाने वाले अहमद पटेल तीन बार लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं और पांच बार उन्हें राज्यसभा का सदस्य होने का गौरव भी प्राप्त है। सोनिया गांधी राजनीतिक मसलों पर अहमद पटेल से ही सलाह लेती थी। गुजरात के भरूच में जन्में अहमद पटेल ने अपना पहला चुनाव भरूच से 1977 में लड़ा था जहां उन्होनें भारी वोटों से जीत दर्ज की थी। उसके बाद 1980 और 1984 में भी अहमल पटेल ने भरूच की सीट से ही चुनाव लड़ा और लगातार अपने वोटो में बढ़ोतरी करते हुए जीत दर्ज की थी। 1993 से लेकर वर्तमान तक कांग्रेस नेता अहमद पटेल राज्यसभा के सदस्य रहे।

1986 में गुजरात कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया

1977 से ही अहमद पटेल कांग्रेस पार्टी का हिस्सा थे, वो कांग्रेस कमेटी के यूथ विंग के अध्यक्ष भी रह चुके थे। कांग्रेस के तालुका पंचायत अध्यक्ष के पद से राजनीति की शुरूआत करना वाले अहमद पटटेल को कांग्रेस में एक समर्पित कार्यकर्ता की तरह काम करने के कारण ही 1986 में गुजरात में काग्रेस पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। नरसिंहा राव के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान अहमद पटेल ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य के रूप में काम करना शुरू किया।

1977 के चुनाव में बचाई थी कांग्रेस की साख

इंदिरा गांधी के समय से ही कांग्रेस पार्टी के लिए काम करने वाले अहमद पटेल ने अपनी विधानसभा सीट से 1977 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए जीत दर्ज कर कांग्रेस की कुछ शाख बचाई थी। अहमद पटेल कांग्रेस की तरफ से 1977 में विधानसभा में जाने वाले कुछ नेताओं में से एक थे। सबसे युवा अध्यक्ष होने के साथ ही अहमद पटेल केवल दूसरे ऐसे मुस्लिम व्यक्ति थे जिन्होनें गुजरात चुनाव में जीत हांसिल की थी।

मंत्री पद नहीं केवल पार्टी के लिए किया कार्य

इंदिरा गांधी के आग्रह करने के बाद भी अहमद पटेल कभी कांग्रेस मंत्रीमंडल का हिस्सा नहीं बने। उसके बाद राजीव गांधी के पद देने पर भी उन्होनें उस पद को अस्वीकार कर दिया और पार्टी के लिए काम करना ही केवल अपना कर्तव्य समझा।
आलोचक भी अहमद पटेल की ईमानदारी की प्रशंसा करते थे। अहमद पटेल की कांग्रेस के प्रति इस तरह की निष्ठा को दिखकर उनके आलोचक भी कहते थे कि उनके कांग्रेस के लिए ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है। राजीव गांधी के साथ मतभेद होने के बाद भी अहमद पटेल राजीव गांधी को अडमायर करते थे।

पटेल जैसा कोई दूसरा नेता नहीं

यह कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस के पास अहमद पटेल जैसा कोई दूसरा नेता नहीं है। गाधी परिवार के बाद वो नंबर दो कहे जाते थे। अहमद पटेल अपने शांत रहने वाले स्वभाव और अपने बारे में मीडिया से कभी भी बात ना करने के कारण भी लोगों को अधिक प्रिय थे। वो चाहते थे कि मीडिया के पास उनकी कोई प्रोफाइल ना हो। लोग कहते उनके बारे में कहते थे कि अहमद पटेल के दिमाग में क्या चल रहा है यह केवल वो ही जानते थे और कोई नहीं

 यह भी पढ़ें: पिछले 48 घंटों में कांग्रेस को लगे दो बड़े सदमे, कोरोना ने छीने दो दिग्गज

Related Articles

Back to top button