बधाई, AIIMS अब सिर्फ एक कदम दूर

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dinesh pathakदिनेश पाठक।

आज खुश होने का मन कर रहा। कारण भी है और प्रेरणादायी बात भी कि कोई काम अगर पूरे मनोयोग से किया जाये तो वह पूरा होकर रहेगा। अभी ख़ुशी का कारण गोरखपुर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से AIIMS के लिए खुटहन गाँव में जमीन देने की घोषणा है। मैं समझता हूँ आज पूर्वी उत्तर प्रदेश को एक ऐसा तोहफा मिला है जिसकी जरूरत उसे वर्षों से थी। जनता ने इसके लिए अनेक आन्दोलन किये, पर सरकारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

मुझे याद आता है जुलाई 2014। मैं गोरखपुर में हिंदुस्तान अख़बार का स्थानीय संपादक था। बजट में वित्त मंत्री ने पूर्वांचल में AIIMS का ऐलान किया लेकिन जगह का खुलासा नहीं किया। लगा कि एक बार जनता को झकझोरने का समय आ गया है। टीम के साथ बैठा। और इसके लिए एक आन्दोलन की भूमिका पर बात की। तय हुआ कि कुछ भी करने से पहले शहर को साथ लेना जरूरी है। हमने एक बैठक महात्मा गाँधी इंटर कॉलेज में बुलाई। इस बैठक में बड़ी संख्या में जागरूक लोगों ने हिस्सा लिया और सहमति बनी कि हिंदुस्तान इस आन्दोलन का अगुवा होगा। अब यह आन्दोलन शहर का बन चुका था।

आजादी की 67 वीं वर्षगांठ पर 67 हजार पोस्ट कार्ड प्रधान मंत्री को भेजने का फैसला हुआ। पहले चरण में इस आन्दोलन को गोरखपुर, महराजगंज, सिद्धार्थ र्नगर, बस्ती, संत कबीरनगर, देवरिया और कुशीनगर जिलों में चलने का फैसला हुआ। आन्दोलन की रिपोर्टिंग भी अखबार में रोज होने लगी। लोग जुड़ने लगे। वह लोग भी सकुचाते-शरमाते शामिल हुए जिन्होंने टुकड़ों में आन्दोलन किये थे। इलाके में पोस्टकार्ड कम पड़ गए। देखते-देखते हमारे ऑफिस का एक कमरा भर गया। इसे गिनने के लिए हमें गोरखपुर विश्वविद्यालय के NSS के छात्रों की मदद लेनी पड़ी।

पोस्ट ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद तय हुआ कि ये पोस्ट कार्ड आरएमएस ऑफिस में गिने जायेंगे। प्रक्रिया शुरू हुई। इस मौके पर भी शहर की कई मशहूर हस्तियाँ मौजूद थी। पूरा दिन गुजर गया। पुराने ज़माने में वोटों की गिनती की तरह पोस्ट कार्ड की गिनती ख़त्म नहीं हुई। पूरे दो दिन तक अतिरिक्त कर्मचारी लगाने के बाद गिनती पूरी हुई। पता चला कि जनता ने प्रधानमंत्री को 139139 पोस्ट कार्ड भेज दिए थे। इसके साथ खून से लिखे गए पत्र भी शामिल थे।

इसी साल फरवरी में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा गोरखपुर आये। सांसद योगी जी की मदद से उनके सामने बात रखने का फैसला हुआ। तय समय से हम मंदिर पहुंचे। एक presentation हमारे साथ था और शहर की वह हस्तियाँ भी जो पहले दिन से हमारे साथ थी या ऐसे भी कहा जा सकता है कि बिना उनके समर्थन के यह आन्दोलन संभव भी नहीं था। स्वास्थ्य मंत्री ने हम सबको सुना और यह भी कहा कि वे कुछ न कुछ करेंगे पर कोई ठोस वायदा उन्होंने नहीं किया। पर सांसद योगी जी ने जरूर पूछा कि अब आप खुश हैं। मैंने भी कहा-जी। मंत्री श्री नड्डा के जाने के ठीक दो दिन बाद हमें लखनऊ की टीम ने जानकारी दी कि केंद्र ने राज्य सरकार से जमीन मांग ली है। और आज सरकार ने जमीन देने की घोषणा भी कर दी।

इस खास मौके पर नाम लेना या गिनाना तो बेहद मुश्किल है लेकिन गोरखपुर और बस्ती मंडल की जनता, जिन्होंने पोस्ट कार्ड लिखा, वह लोग जिन्होंने आन्दोलन में बढचढ कर हिस्सा लिया, लोगों को पोस्ट कार्ड लिखने के लिए प्रेरित किया, निश्चित तौर पर बधाई के पात्र हैं। मैं आज भले ही गोरखपुर में नहीं हूँ, पर खुश हूँ, क्योंकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास में यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होगा और शायद गरीब मासूमों की जान भी बच सकेगी। यद्यपि इसे मूल स्वरुप में आने में अभी कुछ वर्ष लगेंगे पर यह भरोसा करना होगा कि जब बात इतनी आगे बढ़ गई है तो पूरी भी होगी। एक बार पुनः प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, नड्डा जी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी और सांसद योगी जी को साधुवाद कि उन्होंने वर्षों पुरानी जनता की मांग पूरी करने में अपना योगदान दिया…

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