इतने आंदोलन, इतनी कोशिशों की नींव पर खड़ा होगा AIIMS

aiimsगोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में अखिल भारतीय आयुर्विग्यान संस्थान (एम्स) की स्थापना के लिये पांच वर्ष तक लगातार संघर्ष हुआ है। सड़क, सदन और न्यायपालिका में अलग-अलग लोगों और संस्थानों ने दिन-रात एक करके लड़ाई लड़ी तब जाकर एम्स का सपना साकार होने जा रहा है।

गोरखपुर में एम्स के स्थापना की मांग वर्ष 2011 से हो रही है। एक स्थानीय अखबार ने 2012 में ‘यूपी लाओ एम्स’ नाम से अभियान चलाया तो लोगों में और जागरुकता आई। लेकिन केंद्र ने जब रायबरेली में एम्स के स्थापना की घोषणा कर दी तो गोरखपुर निराश हुआ और आंदोलन की धार और तेज होने लगी।

योगी की अहम भूमिका

भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने सदन में मजबूती के साथ गोरखपुर का पक्ष रखा। उन्होंने गोरखपुर में एम्स के मुद्दे पर आंदोलन और पत्रक भी दिये। नगर विधायक डा. राधामोहन दास अग्रवाल और महापौर डा. सत्या पांडेय ने भी समय-समय पर आवाज उठाई।

पूर्वांचल एम्स सत्याग्रह

एम्स की लड़ाई में पूर्वांचल एम्स सत्याग्रह का योगदान बहुत बड़ा है। सत्याग्रह के संयोजक जटाशंकर की अगुआई में चौरीचौरा से लेकर लखनऊ विधानभवन तक 2013 में पदयात्रा निकाली गई। इस यात्रा में शामिल जीपी त्रिपाठी ह्रदयरोगी हैं। इसके बावजूद वह 21 दिन तक एम्स के लिये पैदल चले।

हिन्दुस्तान की मुहिम

एम्स की लड़ाई में सबसे बड़ी मुहिम हिन्दुस्तान अखबार की रही। तत्कालीन स्थानीय सम्पादक दिनेश पाठक की अगुवाई में पूरा गोरखपुर एकजुट हुआ और लाखों पोस्टकार्ड देश के प्रधानमंत्री को भेजे गये।

राजनीतिक आंदोलन

गोरखपुर में एम्स के लिये भारतीय जनता पार्टी, हिन्दू युवा वाहिनी और आम आदमी पार्टी ने भी कई बार धरना प्रदर्शन किया। स्थानीय स्तर पर स्वराज (जे ) पार्टी ने भी एम्स के लिये संघर्ष किया।

व्यक्तिगत प्रयास

बीआरडी मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. केपी कुशवाहा ने इस आंदोलन को हमेशा प्रोत्साहित किया। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डा. आरएन सिंह ने एम्स के लिये गोरखपुर-बस्ती मंडल में व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया। पोस्टकार्ड लेखन का सामूहिक कार्यक्रम डा. सिंह का विशेष योगदान है।

जनहित याचिकाएं

रायबरेली में एम्स की घोषणा के बाद दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राधे मोहन मिश्रा ने हाईकोर्ट में पीआईएल डालकर एतराज किया। बाद में जटाशंकर ने भी पीआईएल डाला। हांलाकि न्यायपालिका ने रायबरेली में एम्स पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

पिपराईच विधायक का योगदान

एम्स की स्थापना के लिये जमीन बड़ा मुद्दा है। पिपराईच की सपा विधायक राजमति निषाद ने खुटहन में जमीन देने की प्रतिबद्धता जताकर एम्स बनने की राह को और आसान कर दिया।

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