जमीन के लिये अखाड़ा परिषद ने ठोंकी ताल

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हरिद्वार। अर्द्धकुंभ मेला अभी विधिवत रूप से शुरु भी नहीं हुआ और विवाद जुड़ने शुरु हो गये। अखाड़ा परिषद ने महिला संतों के परी अखाड़े को अर्द्धकुंभ मेला भूमि आवंटन करने पर विरोध जताते हुए मेले के बहिष्कार की चेतावनी दी है। दोनों अखाड़ा परिषदों (निर्मोही और दत्तात्रेय) ने परी अखाड़े को भूमि आवंटन को गलत ठहराते हुए मेला प्राधिकरण पर गलत परंपरा डालने के आरोप भी लगाये। उन्होंने परी अखाड़े को अखाड़ा परंपरा से अलग और बिना मान्यता का अखाड़ा बताते हुए मेला प्रशासन से उसके भूमि आवंटन को रद्द करने की मांग की।

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अर्द्धकुंभ मेले में परी अखाड़े ने 30 हजार वर्ग फीट भूमि की मांग की थी, मेला प्रशासन ने उसे 10 हजार वर्ग फीट भूमि का आवंटन किया। अर्द्धकुंभ मेला प्राधिकरण के इस फैसले से उसकी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और इलाहाबाद बाघम्बरी गद्दी के पीठाधीश्वर महंत नरेंद्र गिरि ने मेला प्राधिकरण के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मेले के बहिष्कार की चेतावनी दी है।

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उन्होंने कहा कि अखाड़े इसे सहन नहीं करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि इलाहाबाद, नासिक और उज्जैन कुंभ में मेला प्राधिकरण ने भूमि आवंटिन नहीं की थी, न ही शाही स्नान में भाग लेने की अनुमति दी थी। लेकिन हरिद्वार में नई परंपरा डाली जा रही है। उन्होंने मेला प्राधिकरण से परी अखाड़े को किए गए भूमि आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की।

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वहीं, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी ने कहा कि मेला प्राधिकरण ने घोर आपत्तिजनक काम किया है। क्योंकि परी अखाड़ा नाम का न तो कोई अखाड़ा है और न ही अखाड़ा परिषद ने इस नाम के किसी अखाड़े को मान्यता दी है। अखाड़ा परिषद इसका बहिष्कार करती है। उन्होंने मेला प्राधिकरण से आवंटन रद्द करने की मांग के साथ ही ये भी सुझाव दिया कि अखाड़ों को भूमि का आवंटन अखाड़ा परिषद से विचार विमर्श कर ही किया जाय।

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हालांकि मेला प्राधिकरण के भूमि आवंटन प्रभारी ने कहा कि उन्हें विरोध की कोई जानकारी नहीं है, और धार्मिक आयोजन में सभी को भाग लेने, पूजा करने और भूमि पाने का अधिकार है।

 

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