अखाड़ा परिषद ने कहा, साधु बनने से पहले किये अपराधों के खिलाफ नहीं होगी कार्रवाई

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देहरादून। कुछ दिनों पहले ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने फर्जी बाबाओं की लिस्ट जारी की थी। एक बार फिर खबर आई है कि दीवाली के बाद फर्जी बाबाओं की दूसरी लिस्ट जारी की जाएगी। इसके लिए अखाड़ा उन साधुओं की हिस्ट्री का पता उनके शहर से लगाने की कोशिश कर रहे हैं जहां से आकर उन्होंने दीक्षा ली थी।

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अखाड़ा परिषद

अखाड़ा परिषद का कहना है कि की यदि किसी साधु ने दीक्षा लेने से पहले या साधु बनने से पहले कोई अपराध किया था तो उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन यदि साधु बनने के बाद कोई अपराध किया है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि अखाड़ा परिषद फर्जी बाबाओं को ढूंढने का काम शुरू कर चुका है। पहली सूची में उन साधुओं को छेड़ा गया था, जो अखाड़ा परंपरा से नहीं आते। ऐसे में कई अखाड़ों ने चर्चित बाबाओं की जन्म कुंडली निकालनी शुरू कर दी है।

इसके लिए अखाड़ों द्वारा कुछ चर्चित बाबाओं का पूर्व इतिहास गूगल पर भी खंगाला गया है। जानकारी के मुताबिक एक बाबा की गतिविधियों का कच्चा चिट्ठा लेने के लिए अखाड़े के एक प्रतिनिधि को हरिद्वार से बाहर भेजा गया है। इसी प्रकार अन्य कुंभ नगरों और तीर्थों को साधुओं से भी कहा गया है कि वे अपने शहर के उन बाबाओं का ब्योरा इकट्ठा करें जो विवादास्पद माने गए हैं।

अलबत्ता अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी पूर्व इतिहास में जाने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि दीक्षा लेने से पहले कोई क्या था, इससे हमें मतलब नहीं। वास्तव में तो निशाने पर वे फर्जी बाबा हैं जो अपने आप ही खुद को संत बताने लगे हैं। साधु बनने से पहले पूर्व जीवन में व्यक्ति जो कुछ भी रहा हो, वह संन्यास दीक्षा लेने के बाद अर्थहीन हो जाता है।

हालांकि इस बात का फैसला लिया गया है कि संन्यास ग्रहण करने के बाद किसी भी व्यक्ति के नए जीवन की शुरुआत होती है। ऐसे में अगर वो संत बनने के बाद किसी अपराधिक मामले में फंसेगा तो फिर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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