BJP का मजबूत किला ढहाने की कोशिश में अखिलेश, बनाया प्लान

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नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर चल रही सियासी सरगर्मियों के बीच यूपी के समीकरण एक बार फिर बदलते हुए नजर आ रहे हैं। सपा-बसपा और आरएलडी के महागठबंधन से अलग यूपी में कांग्रेस के अकेले चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबले के त्रिकोणीय होने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। दरअसल पश्चिमी यूपी की वीआईपी सीट और भाजपा का मजबूत गढ़ कहे जाने वाले गाजियाबाद में सपा और बसपा एक बार फिर से ‘कैराना वाले फॉर्मूले’ का इस्तेमाल करने के मूड में नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में बड़ा ऐलान हो सकता है।

सपा के टिकट पर बसपा उम्मीदवार
गाजियाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी की तरफ से पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार शर्मा उर्फ मुन्नी शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कांग्रेस ने मेयर का चुनाव लड़ चुकीं डॉली शर्मा को गाजियाबाद सीट से टिकट दिया है। इस सीट से वर्तमान में केंद्रीय मंत्री वीके सिंह भाजपा के सांसद हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि समाजवादी पार्टी अब यहां अपना उम्मीदवार बदलकर कैराना वाला फॉर्मूला अपना सकती है। कैराना में सपा की उम्मीदवार तबस्सुम हसन को आरएलडी के टिकट पर चुनाव लड़ाया गया था और उन्होंने जीत हासिल की थी। अखिलेश यादव गाजियाबाद सीट पर बसपा के उम्मीदवार को सपा के टिकट पर उतारने की योजना बना रहे हैं। दरअसल कांग्रेस की तरफ से ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे जाने के बाद सपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। चर्चा है कि गाजियाबाद से बसपा के पूर्व विधायक सुरेश कुमार बंसल को सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।

भाजपा के ऐलान का इंतजार
बहुजन समाज पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो सपा-बसपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस बात को लेकर लखनऊ में चर्चा हुई है कि बदले हुए समीकरणों को देखते हुए उम्मीदवार को लेकर फिर से विचार किया जाए। मामले की चर्चा गाजियाबाद के सियासी गलियारों में भी है। माना जा रहा है कि गाजियाबाद सीट पर भाजपा उम्मीदवार की घोषणा होने के बाद दोनों दलों की तरफ से इसे लेकर ऐलान किया जा सकता है। आपको बता दें कि सुरेश बंसल गाजियाबाद सीट से बसपा के विधायक रह चुके हैं और शहर के व्यापारियों में उनकी पकड़ भी मानी जाती है। हालांकि इस बारे में अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है लेकिन गाजियाबाद के सपा-बसपा के नेताओं में इसे लेकर चर्चा गरम है।

क्या है वोटों का गणित?
गाजियाबाद लोकसभा सीट पर करीब 27 लाख वोटर हैं। इनमें से ठाकुर, ब्राह्मण, वैश्य और त्यागी मतदाताओं की संख्या करीब 34 फीसदी है। गाजियाबाद में करीब 1.5 से 2 लाख ब्राह्मण मतदाता हैं। वहीं अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या करीब 5 से 6 लाख और मुस्लिम वोट 3 से 4 लाख के करीब है। इनके अलावा ओबीसी मतदाताओं की संख्या यहां 35 फीसदी है, जिनमें जाट, गुर्जर और यादव आदि जातियां शामिल हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद सीट से वर्तमान गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह चुनाव लड़े। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल को 90681 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से वर्तमान केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह चुनाव लड़े और उन्होंने 567260 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। इस सीट पर पिछले 30 सालों के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो केवल 2004 के लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस नेता सुरेंद्र प्रकाश गोयल ने जीत का परचम लहराया था। इससे पहले 1991, 1996, 1998 और 1999 तक लगातार चार बार यहां से भाजपा के रमेश चंद तोमर सांसद रहे।

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