राजनीतिक नेतृत्व की ऐसी खूबियाँ शायद ही किसी नेता में देखी हों आपने

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  • शालीन व्यक्तित्व, बेदाग़ छवि और विकासपरक सोच से यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बनाया राजनीति में ख़ास मुकाम
  • वोट बैंक की राजनीति छोड़कर तरक्की भरे कामों की राह चुनी, विरोधी पार्टी तक के लोगों को बनाया अपना प्रशंसक

लखनऊ। एक सहज इंसान। सख्त प्रशासक। कुशल राजनेता। कामयाब मुख्यमंत्री। गैर विवादित व्यक्तित्व। ईमानदार छवि। अपने फैसले लेने वाले, उन पर टिके रहने वाले। तरक्की की बातें सोचना, उन पर काम कराना…और भी न जाने क्या-क्या। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए आप ये सारे शब्द एक साथ भी प्रयोग कर सकते हैं। यहाँ तक कि अखिलेश यादव की विकासपरक सोच और तरक्की भरे नजरिये की तारीफ तो विरोधी दलों के नेता भी खुलकर करते हैं। यानि अखिलेश यादव ने अपने बेहतरीन कामकाज और शालीन आचरण से देश की राजनीति में इतनी कम उम्र में ही प्रेरणादायी छवि बना ली है। वह एक ऐसे नेता के रूप में उभरकर सामने आये हैं जिनका सभी पार्टियों में सम्मान है। आज की तारीख में समाजवादी पार्टी में अखिलेश से बड़ा कोई चेहरा नहीं है। अखिलेश की छवि बेदाग है। उनके ऊपर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है और छवि एक विकास पुरूष जैसी है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की विकासपरक सोच और तरक्की भरे नजरिये की तारीफ तो विरोधी दलों के नेता भी खुलकर करते हैं।

नहीं की लोगों की बातों की परवाह

2012 में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार पूर्ण बहुमत से बनी और अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाला उस समय विरोधी दलों ने सपा के इस फैसले को सहज रूप में नहीं लिया था। अन्य राजनीतिक पार्टियों ने कहना शुरू कर दिया कि भले ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हों लेकिन किसी भी फैसले में उनके पिता मुलायम सिंह यादव और अन्य परिजनों की बात ही मानी जायेगी। क्योंकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव, चाचा शिवपाल सिंह यादव और राम गोपाल यादव सभी पुराने मंझे हुए अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं। अखिलेश यादव ने ऐसे किसी भी आरोप की परवाह नहीं की। बल्कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास का खाका तैयार करना शुरू कर दिया। उन्होंने कार्य योजनाएं बनाई कि प्रदेश को कैसे तरक्की की राह पर ले जाना है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 2012 के समाजवादी ‘क्रांति रथ यात्रा’ की तर्ज पर पूरे प्रदेश में ‘समाजवादी विकास रथ यात्रा पर निकलने वाले हैं ताकि प्रदेश की जनता को उनकी सरकार के विकास कार्यों की जानकारी दी जा सके।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तकनीक पर ख़ास ध्यान दिया। इसका फायदा ये हुआ कि उनकी योजनाओं में भ्रष्टाचार नहीं हो सका।

विकास योजनाओं लगा लगा दिया अंबार

मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही अखिलेश यादव ने अपने फैसले लेने शुरू किये। उन्होंने अपनी योजनाओं में हर वर्ग, हर तबके का ध्यान रखा। लैपटॉप योजना, शिक्षा से जुड़ी योजनाएं, बुंदेलखंड के विकास के लिए ढेरों योजनाएं एवं राहत पैकेज, समाजवादी पेंशन योजना, सौर ऊर्जा, बिजली परियोजनाएं, कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखना, समाजवादी एम्बुलेंस सेवा, डायल 100, 1090 परियोजना आदि इतनी विकास योजनाएं शुरू कीं जिन्होंने उत्तर प्रदेश को तरक्की की राह पर तेजी से दौड़ा दिया। सबसे ख़ास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने तकनीक पर ख़ास ध्यान दिया। इसका फायदा ये हुआ कि इन योजनाओं में किसी में भी भ्रष्टाचार नहीं हो सका।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कभी समझौता नहीं किया।

कानून-व्यवस्था के लिए सजग

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कभी समझौता नहीं किया। बल्कि उन्होंने पुलिस को अपराध नियंत्रण के लिए सदैव प्रेरित किया कहीं हालात बिगड़ते देखे तो उन्होंने पुलिस अफसरों को चेतावनी दी। अगर कोई गंभीर शिकायत मिली तो सस्पेंड भी किया। लॉ-एंड-ऑर्डर के मामले में फैसले लेने में मुख्यमंत्री ने कभी समझौता नहीं किया। बीते दिनों बुलंदशहर में नेशनल हाईवे पर माँ-बेटी से गैंगरेप मामले में तो उन्होंने जानकारी मिलते ही तुरंत पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद और गृह सचिव देवाशीष पंडा को तुरंत हेलिकॉप्टर से मौके पर भेजा। लापरवाही बरतने वाले पुलिस अफसरों को सस्पेंड और तबादला किया।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गुंडागर्दी के ख़िलाफ़ हैं, राजनीति के अपराधीकरण के ख़िलाफ़ हैं।

आपराधिक छवि वालों से दूरी

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गुंडागर्दी के ख़िलाफ़ हैं, राजनीति के अपराधीकरण के ख़िलाफ़ हैं। उत्तर प्रदेश के साथ समाजवादी पार्टी का भी सौभाग्य है कि उन्हें नए ज़माने के नेता के रूप में अखिलेश यादव मिले हैं, जिन्होंने एक झटके में अपनी पार्टी को ‘आपराधिक छवि’ से बाहर निकाल लिया है, वगैर वोट-बैंक की परवाह किये। यहाँ तक कि 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले माफिया नेता माने जाने वाले डीपी यादव को पार्टी में शामिल करने का उन्होंने जबरदस्त विरोध किया था। उस समय अखिलेश समाजवादी पार्टी के महासचिव थे। लेकिन सपा से अपराधियों को दूर रखने की उनकी कोशिश उसी समय से शुरू हो चुकी थी। आखिरकार डीपी यादव सपा में नहीं शामिल हो सके। इसी प्रकार इसी साल जून महीने में माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय के खिलाफ भी अखिलेश यादव अड़ गए। यहाँ तक कि पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में भी उनके इस फैसले के खिलाफ कोई एक शब्द नहीं बोल सका।मुख्यमंत्री का मानना है कि आपराधिक छवि वाले लोगों को पार्टी से जोड़ने या उनसे गठबंधन करने की बजाय सपा अपने विकास कार्यों के आधार पर अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी। क्योंकि जितने विकास कार्य सपा के शासन काल में हुए हैं, उतने आजतक किसी सरकार ने नहीं कराये।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक ऐसे नेता के रूप में उभरकर सामने आये हैं जिन्होंने वोट बैंक की राजनीति नहीं की।

छवि सपा को बनाया राष्ट्रीय पार्टी

अपने विकास कार्यों और अपनी बेदाग़ छवि से अखिलेश यादव ने न सिर्फ अपना राजनीतिक कद बहुत ऊँचा किया है बल्कि समाजवादी पार्टी की छवि भी राष्ट्रीय स्तर पर एक ख़ास मुकाम पर पहुंचा दी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक ऐसे नेता के रूप में उभरकर सामने आये हैं जिन्होंने वोट बैंक की राजनीति नहीं की। न ही पार्टी में ऐसे वोट बैंक के कल्चर को बढ़ावा दिया।लोग इस बात के प्रति भी आश्वस्त हैं कि अखिलेश की पार्टी यूपी में तो मजबूत है ही, वोट-बैंक की पॉलिटिक्स से निकलने की कोशिश करके उन्होंने अपनी पार्टी की छवि राष्ट्रीय बना ली है। इस बात में दो राय नहीं है कि अगर 2017 में अखिलेश यादव के व्यक्तित्व, उनके विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था के प्रति उनकी सोच को लेकर वोट डाले गए तो दोबारा अखिलेश ही सत्ता में आएंगे और अगर फिर से वह मुख्यमंत्री बने तो 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी पार्टी मेजर रोल प्ले करेगी।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
दूसरों की कमियां निकालने या आरोप-प्रत्यारोप करने की बजाय अपने विकास कार्यों का जिक्र करने में ज्यादा यकीन रखते हैं अखिलेश यादव।

शालीन व्यक्तित्व

राजनीति में बयानबाजी और आपसी प्रतिद्वंदिता में आजकल बहुत से नेता मर्यादाएं तक भूल जाते हैं। बेहूदा और भद्दी बयानबाजी कर जाते हैं। मगर मौजूदा मुख्यमंत्री और तीन बार सांसद भी रह चुके अखिलेश यादव के साथ ऐसा एक भी विवाद नहीं जुड़ा है। वह अपनी बातचीत में विपक्षियों के लिए भी सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। सबसे ख़ास बात यह है कि वह दूसरों की कमियां निकालने या आरोप-प्रत्यारोप करने की बजाय अपने विकास कार्यों का जिक्र करने में ज्यादा यकीन रखते हैं। आज तक उन्होंने किसी भी मामले में किसी राजनीतिक दल या नेता के प्रति कोई भी आपत्तिजनक या अपमानजनक शब्द प्रयोग नहीं किया। यहाँ तक कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बैठकों में भी उन्होंने पुलिस अफसरों को फटकार तो लगाई लेकिन अपमान किसी का नहीं किया।

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