100 साल पुरानी मस्जिद को लेकर अखिलेश यादव का बयान, BJP पर कसा तंज

अखिलेश यादव ने इसे निंदनीय बताया है। उन्होने ने कहा है कि शासन-प्रशासन का यह कृत्य भारतीय संविधान के समाजिक सदभाव के अवधारणा के खिलाफ है।

लखनऊ: बाराबंकी के राम सनेही घाट की पुरानी गरीब नवाज मस्जिद के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने एक बयान जारी किया है। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर काफी हलचल है। पिछले मंगलवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड की तरफ से आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में प्रशासन ने एक मस्जिद को गिरा दिया है।

आपको बता दें कि यह मस्जिद 100 साल पुरानी है। मस्जिद को लेकर कोई विवाद नहीं था। इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड में भी सूचीबद्ध किया गया है। राम सनेही घाट के एसडीएम ने मार्च में मस्जिद समिति से मस्जिद के कागजात मांगे थे, जिसके खिलाफ मस्जिद प्रबंधन समिति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

इस मामलें को लेकर अखिलेश यादव ने इसे निंदनीय बताया है। उन्होने ने कहा है कि शासन-प्रशासन का यह कृत्य भारतीय संविधान के समाजिक सदभाव के अवधारणा के खिलाफ है। उन्होने ने ये भी कहा कि चुनाव नजदीक आते देखकर भाजपा सरकार लोगों में संप्रदायिकता फैलाने का काम शुरु कर दिया है। देश की गंगा जमुना तहजीब को बिगाड़कर अपनी राजनीति करना चाहती है।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा नफरत की राजनीति से धार्मिक उन्माद फैलाना चाहती है। उन्होने जनता से ये भी अपील किया कि इससे सतर्क रहें। सौ वर्ष पुरानी मस्जिद को तोड़ना सत्ता का दुरुपयोग है। उन्होने इस घटना की जांच की मांग माननीय उच्च न्यायालय के सिटिंग जज से की है और मस्जिद को दुबारा से बनाने का आग्रह किया है।

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