अखिलेश की हर बात काट देते हैं आजम

akhilesh-azam-1लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार जनता में खुद को एक सजग राजनेता के तौर पर पेश करने का प्रयास करते हैं, लेकिन उनके वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री आजम खां उनके ही फैसलों और घोषणाओं पर टिप्पणी कर उसे तार-तार कर देते हैं। इस कारण मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चार कदम आगे बढ़ने की जगह आठ कदम पीछे हो जाते हैं।

राजनीतिक हलकों में यहां तक चर्चा है कि आजम जानबूझकर अपनी टिप्पणियों से अखिलेश को अपने से कमतर दिखाने का प्रयास करते हैं। हाल ही में अखिलेश ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में गठबंधन के सवाल पर कहा था, “अगर नेताजी (मुलायम सिंह यादव) को प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को उपप्रधानमंत्री बनाया जाए, तो मैं अभी के अभी गठबंधन के लिए हां कहता हूं।”

वहीं दो दिन पहले कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आजम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश नहीं चला पा रहे हैं, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके बाद उन्होंने कहा, “मेरे प्रधानमंत्री बनने में किसी को क्या परेशानी है? क्या कमी है मेरे अंदर? मैं प्रधानमंत्री बना तो फिर देखिए देश कैसे चलता है।” ऐसा मुमकिन कैसे होगा, इस सवाल पर आजम ने कहा, “मोदी जी इस्तीफा दे दें। सारी पार्लियामेंट मिलकर मुझे प्रधानमंत्री बनाए।”

उन्होंने एक शेर के जरिए कहा, “हकीकत कह रहा हूं, कुछ बयानी मत समझ लेना, बहारें लौट आएंगी बागबां बना दो मुझको।” सपा सरकार के इसी शासनकाल के शुरुआती दौर में आजम ने अखिलेश को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने से मना कर दिया था। मुलायम के बहुत मनाने के बाद वह माने थे। अखिलेश ने जब आजम को मेरठ के प्रभारी मंत्री पद से हटाया तो वह इतना नाराज हो गए कि इस्तीफे की पेशकश कर दी थी।

आजम के धुर विरोधी अमर सिंह के करीबियों और कुछ नए चेहरों को अखिलेश ने मंत्रिमंडल में स्थान दिया तो उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की और राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल नहीं हुए। इसी तरह दादरी कांड पर सरकार की इच्छा के खिलाफ आजम ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर कहा कि यूपी में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं। इसके बाद अखिलेश ने भी आजम को सलाह दी थी कि घर की बात घर में ही रहनी चाहिए।

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