वाराणसी के बगल में है यह शहर, दिए 7 प्रधानमंत्री, मिला कुछ नहीं

इलाहाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का कायाकल्‍प करने की तैयारी में हैं। जापानी पीएम शिंजो आबे के साथ मिलकर मोदी वाराणसी को हाईटेक क्‍योटो सिटी बनाने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन वाराणसी के पास एक ऐसा शहर भी है, जिसने अकेले ही देश को सात प्रधानमंत्री दिए। इसके बावजूद यह शहर आज भी तमाम मुश्किलों से जूझ रहा है। क्‍योटो तो दूर देश के सबसे बेहतर शहरों में भी इसका नाम नहीं आता है।

यह शहर है इलाहाबाद। संगम की इस नगरी का धार्मिक महत्‍व भी कम नहीं। हर साल तमाम धार्मिक आयोजनों में यहां दुनियाभर के लोग आते हैं। लेकिन आज भी इस शहर को वह पहचान नहीं मिली, जो कुछ अरसे बाद वाराणसी काे मिल जाएगी। जानिए सात प्रधानमंत्री देने वाले इलाहाबाद को आज तक किससे क्‍या मिला।

nehru-kgkE--621x414@LiveMint

जवाहर लाल नेहरू

आजादी के बाद चुनाव हुए तो नेहरू ने इलाहाबाद पूर्व (फूलपुर) को अपना चुनाव क्षेत्र चुना। यहीं से विजयी होकर देश के पहले प्रधानमंत्री की शपथ लेने दिल्ली पहुंचे। नेहरू के बाद फूलपुर सीट से उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित चुनाव जीतीं। नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को इलाहाबाद के मीरगंज में हुआ था। स्वतंत्रता सेनानी और इनके पिता मोतीलाल नेहरू का निवास आनंद भवन आजादी की लड़ाई के दौरान कांग्रेसी गतिविधियों का केंद्र बिंदु हुआ करता था। उपेक्षा का यह मजंर यहां तक है की मीरगंज इलाका अब रेड लाइट एरिया घोषित हो चुका है।

nanda

गुलजारी लाल नंदा

जवाहर लाल नेहरू के बाद 27 मई 1964 को प्रधानमंत्री बने गुलजारी नंदा की शिक्षा इलाहाबाद में ही हुई। इन्‍होंने शहर में रहते हुए अपने राजनीति जीवन की शुरूआत की। असहयोग आंदोलन के समय भी नंदा ने अपना अधिक समय इलाहाबाद में गुजारा था।

lal-bahadur-shastri-ji

लाल बहादुर शास्‍त्री

9 जून 1964 को देश के तीसरे प्रधान मंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री का भी इलाहाबाद से अटूट लगाव रहा। वैसे तो इनका जन्म 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। लेकिन संगम नगरी इनका कार्य क्षेत्र रहा। सबसे पहले 1929 में इलाहाबाद आने के बाद उन्होंने टण्डनजी के साथ भारत सेवक संघ की इलाहाबाद इकाई के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया। इलाहाबाद में नेहरूजी के साथ उनकी निकटता बढी। इसके बाद तो शास्त्रीजी का कद निरन्तर बढता ही चला गया और एक के बाद एक सफलता की सीढियां चढते हुए। वे नेहरूजी के मंत्रिमण्डल में गृहमंत्री तक रहे। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय शास्त्रीजी ने इलाहाबाद के उरुवा ब्लॉक में  जय जवान, जय किसान का  नारा दिया था।

Indira_Gandhi

इंदिरा गांधी

देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर, सन् 1917 में इलाहाबाद के स्वराज भवन में हुआ। वे पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनकी पत्नी कमला नेहरू की एकलौती संतान थीं। इलाहाबाद उनका कार्यक्षेत्र तो नहीं रहा लेकिन अपनी जन्‍मभूमि से उनका लगाव किसी से छिपा नहीं है।

rajiv-gandhi12

राजीव गांधी

देश के नौवें प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी का जन्म 20  अगस्त 1944 को मुम्बई में हुआ। लेकिन राजीव अपने पैतृक शहर इलाहाबाद को लेकर अक्‍सर चिंतित दिखे। समय-समय पर इलाहाबाद भी आते रहे। उनके पिता फिरोज गांधी को अंत्‍येष्ठि इलाहाबाद में हुई थी। इसलिए भी राजीव का इस शहर से गहरा नाता रहा।

vishwa

विश्वनाथ प्रताप सिंह

देश के दसवें प्रधानमंत्री बने विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्‍म 25 जून 1931 को इलाहाबाद में ही हुआ था। इनकी शिक्षा इलाहाबाद में हुई। विश्वनाथ प्रताप सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र संघ उपाध्यक्ष भी थे। वे इलाहाबाद की अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अधिशासी प्रकोष्ठ के सदस्य भी रहे। उस दौर में इलाहाबाद की आबोहवा को विश्‍वनाथ से बेहतर शायद ही कोई समझता हो।

chandrasekhar_primeminister

चन्द्रशेखर

देश के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में 10 नवम्बर 1990 को देश की सत्ता संभालने वाले चन्द्रशेखर का जन्म 1 जुलाई 1927 को बलिया जिले के इब्राहीमपट्टी के एक किसान परिवार में हुआ था। चन्‍द्रशेखर ने युवावस्‍था का दौर इलाहाबाद में बिताया। यहां इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एमए की पढ़ाई के दौरान चन्‍द्रशेखर विश्वविद्यालय के हिन्दू हास्टल के कमरा नम्बर 11 में रह करते थे। इलाहाबाद से उनका लगाव इसी बात से समझा जा सकता है कि जब भी कोई उन्‍हें किसी आयोजन के लिए इलाहाबाद बुलाता था तो वह जरूर आते थे।

allahabad-sangam-ghat-copy

विकास के नाम पर शहर को कुछ नहीं मिला। शहर आज भी आधुनिक संसाधनों से दूर है। सात प्रधानमंत्रियों को पहचान देने वाले इस शहर में एक भी औद्योगिक इकाई नहीं है। कभी यूपी की राजधानी रहे इलाहाबाद में जो बिजनेस इंडस्‍ट्री थीं, आज उनकी सांसें टूट चुकी हैं। शिक्षा के मामले में भी अब इलाहाबाद पिछड़ता जा रहा है। एक दौर था जब सिविल सेवा की तैयारियों के लिए देश भर से लोग इलाहाबाद आते थे, लेकिन आज ज्‍यादातर युवाओं को रुख दिल्‍ली-मुंबई और राजस्‍थान की तरफ हो गया है। दुनिया भर में देश को पहचान देने वाले इलाहाबाद को न मेट्रो मिली, न मेट्रो सिटी का दर्जा।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button