श्रमिक संगठनों का आरोप, ‘सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का बना रही मजाक’

वीडियो बैठक में सभी केंद्रीय श्रमिक संगठनों, राज्य सरकारों, अन्य प्रमुख श्रमिक संगठनों, उद्योग संगठनों और अन्य पक्षों को आमंत्रित किया गया है।

नई दिल्ली: केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री संतोष गंगवार को एक पत्र लिखा है और श्रम संहिताओं पर व्यापक, विस्तृत और गंभीर विचार विमर्श करने की मांग की है। इसी को लेकर संतोष गंगवार ने चारों श्रम संहिताओं की नियमावली पर चर्चा करने के लिए आज वीडियो बैठक बुलाई है।

श्रमिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का मजाक बना रही है। देश के लगभग 50 करोड़ श्रमिकों के बारे में कोई फैसला कुछ घंटे की वीडियो बैठक में नहीं किया जा सकता। वीडियो बैठक में सभी केंद्रीय श्रमिक संगठनों, राज्य सरकारों, अन्य प्रमुख श्रमिक संगठनों, उद्योग संगठनों और अन्य पक्षों को आमंत्रित किया गया है। इन संहिताओं को लेकर प्रत्येक पक्ष की गंभीर आपत्तियां और आशंकायें हैं जिनपर कुछ घंटे में मंथन नहीं हो सकता। इसलिए सरकार को प्रत्येक श्रम संहिता पर अलग से विचार विमर्श करना चाहिए और प्रत्येक बैठक आमने सामने होनी चाहिए। इससे प्रत्येक पक्ष को अपनी बात कहने का पूरा मौका मिलेगा और उनकी शंकाओं का निवारण हाे सकेगा।

संगठन द्वारा दी गई खबर में कहा गया है कि इन श्रम संहिताओं को संसद में शोर शराबे के बीच बिना किसी गंभीर बहस के पारित किया गया है और इन पर पर्याप्त मंथन नहीं किया गया है। पत्र पर भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियंस कांग्रेस, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियंस कांग्रेस, हिन्दुस्तान मजदूर सभा, सेंटर फॉर ट्रेड यूनियंस, अखिल भारतीय यूनियंस ऑफ ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ट्रेड यूनियन कांग्रेस समिति, सेवा, अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी ऑफ ट्रेड यूनियन कांग्रेस,लेफ्ट पीपुल्स फ्रंट और यूनियंस ऑफ ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किये हैं।

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