वरिष्ठ नेता यूसुफ तारिगामी का आरोप, कहा- “लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन जारी”

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने आरोप लगाया।

श्रीनगर: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने आरोप लगाया कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद से ही केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की ओर से यहां के लोगों के मूलभूत तथा लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन जारी है।

तारिगामी ने यहां शनिवार को एक बयान में कहा,“जम्मू-कश्मीर के लोगों की राय लिये बिना राज्य को मिले विशेष दर्जे को वापस लेना संविधान के अनुच्छेद 3 का उल्लंघन है। अप्रैल में अधिसूचित नये अधिवास नियम (डोमिसाइल कानून) की तरह 27 अक्टूबर को नये भूमि कानून अधिसूचित किये गये हैं। इस पर जम्मू-कश्मीर के लोगों ने जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की, जिस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह समझना जरूरी है कि अब जम्मू-कश्मीर में कौन जमीन खरीदेगा। नये भूमि कानूनों से बड़े भू माफियाओं और कॉर्पोरेट को मनमाने तरीके से काम करने की आजादी मिलेगी, जिससे यहां के लोगों और उनके बच्चों द्वारा दशकों से की गयी मेहनत बर्बाद हो जायेगी।”

तारीगामी ने कहा,“केंद्र सरकार द्वारा बाहरी लोगों को जम्मू-कश्मीर में जमीन लेने की अनुमति दिये जाने के कुछ ही दिनों बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने तथाकथित निवेश उद्देश्यों से 24 हजार कनाल जमीन उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को दे दी है, जबकि वन विभाग से मंजूरी मिलने के तुरंत बाद लगभग इतनी ही जमीन को 65 बड़े कॉर्पोरेट घरानों के लिये अधिसूचित किया जायेगा। सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के 5 अगस्त 2019 के फैसले को चुनौती देने वाली 23 याचिकाएं दायर हैं। सरकार के लिये उचित होगा कि वह इन याचिकाओं पर अदालत के फैसले का इंतजार करे। मेरी देशवासियों से अपील है कि वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को लेकर उनके साथ एकजुटता दिखायें और मोदी सरकार के झूठे प्रचार प्रसार को नकार दें।”

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