अमरनाथ यात्रा रद्द, Online दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु, जानिए पूरी रिपोर्ट

कोरोना महामारी के कारण इस साल अमरनाथ यात्रा रद्द, श्राइन बोर्ड ने दुनिया भर में भक्तों के लिए ‘ऑनलाइन’ दर्शन की व्यवस्था की है

नई दिल्ली: अमरनाथ यात्रा (Amarnaath Yatra) करने वाले श्रद्धालुओं को निराश होना पड़ेगा। इस भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन नहीं कर पाएंगे। कोरोना महामारी को देखते हुए जम्मू कश्मीर प्रशासन ने इस साल अमरनाथ यात्रा रद्द करने का फैसला किया है। इस बात की घोषणा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की है। दूसरी तरफ अमरनाथ श्राइन बोर्ड (Shrine Board) ने दुनिया भर में भक्तों के लिए ‘ऑनलाइन’ दर्शन की व्यवस्था की है।

अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। इस गुफा की लंबाई 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। यब गुफा 11मीटर ऊंची है। अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को ‘अमरत्व’ का रहस्य बताया था।

पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग

यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं। गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूंदें जगह-जगह टपकती रहती हैं।

 

यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूंदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है। चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड हैं।

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