ऐमज़ॉन फेमा और एफडीआई नीतियों के उल्लधंन का दोषी: कैट

न्यायालय के उस आदेश का स्वागत किया है जिसमें उसने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन के लिए ऐमज़ॉन को जिम्मेदार ठहराया है।

नई दिल्ली: अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश का स्वागत किया है जिसमें उसने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन के लिए ऐमज़ॉन को जिम्मेदार ठहराया है।

न्यायालय ने सोमवार को रिलायंस रिटेल और फ्यूचर ग्रूप से जुड़े सौदे की एक याचिका पर फैसले में प्रथम दृष्टया में एमेजॉन को सरकार की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई )नीति के प्रावधानों के उल्लंघन मामले में भी उत्तरदायी माना था। न्यायालय ने नियामकों से सौदे पर फैसला लेने को कहा है।

ऐमज़ॉन को तगड़ा झटका लगा

इससे पहले 20 नवंबर को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर समूह के सौदे को मंजूरी दे दी थी,जिसके बाद दोनों कंपनियां सौदे को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं। सीसीआई के फैसले से भी अमेरिकी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन को तगड़ा झटका लगा था।

कैट महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया में कहा, “यह फैसला परिसंघ के रुख की पुष्टि करता है। हमारा लंबे समय से मानना है कि एमेजॉन सरकार की एफडीआई नीति का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है। ऐमज़ॉन अपने लाभ के लिए कानूनों का तोड़- मरोड़ कर रहा है। प्रवर्तन निदेशालय और अन्य संवैधानिक अधिकारियों को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि कानूनों का दुरुपयोग रोका जा सके।

एफडीआई नियमों के खिलाफ

खंडेलवाल ने कहा कि ई-कॉमर्स के माध्यम से देश के खुदरा बाजार को नियंत्रित करने और उस पर हावी होने के लिए एमेजॉन जो जोड़ तोड़, जबरदस्ती, मनमानी और तानाशाही नीतियां अपना रहा है वह अब समाप्त होनी चाहिए। एमेजॉन ने मनमाने तरीके से फ्यूचर कूपन लिमिटेड पर प्रभुत्व जमा कर फ्यूचर रिटेल का नियंत्रण हासिल कर लिया है और वह भी बिना किसी सरकारी मंजूरी के, अभाव में। व्यापारी संगठन के अनुसार यह फेमा और एफडीआई नियमों के खिलाफ है।

हाल ही में कैट ने फ्यूचर ग्रुप और एमेजॉन के सौदे की वाणिज्य मंत्री, वित्त मंत्री, प्रवर्तन निदेशालय, सेबी और आरबीआई से शिकायत की थी। एमेजॉन पर कार्यवाही की मांग करते हुए सीएआईटी ने शिकायत के साथ कई सबूत और दस्तावज भी संबंधित अधिकारियों को सौंपे थे।
सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना कि रिलायंस को सौदे की मंजूरी देने वाला फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) बोर्ड का प्रस्ताव मान्य है और पहली नजर में वैधानिक प्रावधानों के अनुसार है।

ऐमज़ॉन ने इसे अमान्य करार दिया

ऐमज़ॉन ने इसे अमान्य करार दिया था। न्यायालय ने 132 पेज के अपने आदेश में यह भी कहा कि एमेजॉन ने फेमा और एफडीआई के नियमों का उल्लधंन किया है। एमेजॉन ने विभिन्न समझौते करके एफआरएल पर नियंत्रण करने की कोशिश की जिसे सही नहीं ठहराया जा सकता।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) ने इस साल अगस्त में फ्यूचर ग्रुप के रीटेल एंड होलसेल बिजनेस और लॉजिस्टिक्स एंड वेयरहाउसिंग बिजनेस के अधिग्रहण का ऐलान किया था। इस सौदे के बाद फ्यूचर ग्रुप के 420 शहरों में फैले हुए 1,800 से अधिक स्टोर्स तक रिलायंस की पहुंच बन जाती। यह सौदा 24713 करोड़ में हुआ है।

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