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Ambedkar Jayanti 2021: बाबासाहेब की 130वीं जयंती पर दिग्गजों ने किया नमन, जानें इस दिन का महत्व

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की 130वीं जयंती पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री मोदी, मायावती समेत देश के कई बड़े नेताओं ने उन्हें याद किया

लखनऊ: पूरे भारत में आज संविधान के निर्माता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की 130वीं जयंती (Ambedkar Jayanti) मनाई जा रही है। सन् 1990 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक ‘भारत रत्न’ सम्मान से मरणोपरान्त सम्मानित किया गया था। 14 अप्रैल को उनका जन्म दिवस अंबेडकर जयंती के तौर पर भारत समेत दुनिया भर में मनाया जाता है। इस मौके पर देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समेत देश के तमाम बड़े दिग्गज नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कि है।

बाबासाहब डॉ.भीमराव अंबेडकर की 130वीं जयंती पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट करके कहा कि, भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्‍पी, बाबासाहब डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। डॉ.अंबेडकर ने समतामूलक न्‍यायपूर्ण समाज बनाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। आज हम उनके जीवन तथा विचारों से शिक्षा ग्रहण करके उनके आदर्शों को अपने आचरण में ढालने का संकल्‍प लें।

मायावती ने कही ये बात

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कहा कि आज भारतीय संविधान के मूल निर्माता और दलितों, शोषितों व अन्य उपेक्षित वर्गों के मसीहा बाबासाहब डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती है। कोरोना प्रकोप के चलते और सभी सरकारी नियमों का अनुपालन करते हुए BSP के लोग पूरे देश में बहुत सादगी के साथ इनकी जयंती मना रहे हैं।

मैं बाबासाहब डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती पर केंद्र और राज्य सरकारों से अनुरोध करती हूं कि वो आज पूरे देश में गरीब और जरूरत मंद लोगों को वैक्सीन मुफ़्त में लगाने का निर्णय लें और ऐलान करें। केंद्र सरकार ने 14 अप्रैल तक COVID-19 वैक्सीन लगाने को उत्सव के ​रूप में मनाने का जो विशेष अभियान चलाया है वो अच्छी बात है। लेकिन अगर ये उत्सव देश के गरीब और जरूरत मंद लोगों को फ्री में वैक्सीन लगाने के रूप में मनाया जाता तो ज्यादा उचित होता।

बेंगलुरु में श्रद्धांजलि

कर्नाटक (Karnataka) के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा ने भी डॉ.भीमराव अंबेडकर की 130वीं जयंती पर उन्हें बेंगलुरु में श्रद्धांजलि दी है।

भेदभाव के विरुद्ध अभियान

डॉ.भीमराव अंबेडकर लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आन्दोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे।

अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14 वीं व अंतिम संतान थे। उनका परिवार कबीर पंथ को माननेवाला मराठी मूल का था और वो वर्तमान महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में आंबडवे गांव का निवासी था। वे हिंदू महार जाति से संबंध रखते थे, जो तब अछूत कही जाती थी और इस कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव सहन करना पड़ता था। भीमराव अंबेडकर के पूर्वज लंबे समय से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत रहे थे और उनके पिता रामजी सकपाल, भारतीय सेना की महू छावनी में सेवारत थे तथा यहां काम करते हुये वे सूबेदार के पद तक पहुँचे थे। उन्होंने मराठी और अंग्रेजी में औपचारिक शिक्षा प्राप्त की थी।

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