अमेरिका, फ्रांस ने नागोर्नो-काराबाख में संघर्ष विराम पर रूस की भूमिका को मान्यता दी

अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया, “हम रूस द्वारा करीब एक सप्ताह के संघर्ष विराम के लिए किए गए कार्यों को पहचान कर रहे हैं लेकिन अभी भी बहुत सारे सवाल हैं.

वाशिंगटन: अमेरिका और फ्रांस ने नागोर्नो-काराबाख में अर्मेनिया तथा अजरबैजान के बीच संघर्ष विराम के लिए रूस के योगदान को मान्यता दे दी है लेकिन वह इस समझौते के मापदंडों में पूरी पादर्शिता चाहते हैं।

रूस से पारदर्शिता की आवश्यकता : अमेरिका

अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया, “हम … रूस द्वारा करीब एक सप्ताह के संघर्ष विराम के लिए किए गए कार्यों को पहचान कर रहे हैं लेकिन अभी भी बहुत सारे सवाल हैं, समझौते के मापदंडों को लेकर रूस से पारदर्शिता की आवश्यकता है और जिसमें तुर्की की भूमिका शामिल है।”

कई हफ्तों की लड़ाई के बाद संघर्ष विराम के समझौते पर किए हस्ताक्षर

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मध्यस्थता से नागोर्नो-कराबाख के विवादित क्षेत्र में कई हफ्तों की लड़ाई के बाद अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोलस पशिनियन ने संघर्ष विराम के समझौते पर हस्ताक्षर किए। अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और फ्रांस ओएससी मिन्स्क समूह के रूस के साथ संघर्ष के समाधान कराने में अपनी भूमिकाओं के लिए प्रतिबद्ध है।

नागोर्नो-काराबाख़ दक्षिण कॉकस के इलाक़े में स्थित

नागोर्नो-काराबाख़ दक्षिण कॉकस के इलाक़े में स्थित एक क्षेत्र है। यह कॉकस पर्वत शृंखला की हीनकॉकस पहाडियों में आता है। इसका ज़्यादातर हिस्सा पहाड़ी है और वनों से भरपूर है। इसका क्षेत्रफल लगभग 4400 वर्ग किमी है। अज़रबैजान इस अपना हिस्सा मानता है और औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे उस देश का हिस्सा माना जाता है। यहाँ पर अज़रों की बजाए अर्मेनियाई लोगों की बहुतायत है और, आर्मीनिया की मदद से सन् 1991 के बाद से नागोर्नो-काराबाख़ अपने-आप को वास्तविकता में अज़रबैजान से अलग कर चुका है और स्वतन्त्र राष्ट्र की तरह अपने मामले संभालता है।

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