चीन से नाराज अमेरिका सरकार, कई मुद्दों पर नहीं करेगी कोई समझौता

वाशिंगटन: अमेरिका की बाइडन सरकार चीन (China) के लिए सख्त नजर आ रहे है। बाइडन ने साफ कर दिया है कि चीन के साथ जलवायु परिवर्तन के लिए बौद्धिक संपदा की चोरी और दक्षिण चीन सागर पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा हमारे देश का चीन (China) से व्यवहार हमेशा से खराब चलते आया है। इस बार कोरोना महामारी, व्यापार, सहित कई मुद्दों पर चीन से टकराव की स्थिति बन सकती है। दक्षिण चीन सागर और मानवाधिकारों के मामले में सैन्य गतिविधियां आक्रामक हैं।

राष्ट्रपति बाइडन के लिए जलवायु परिवर्तन एक ऐसा मुद्दा है जिसको ध्यान में रखते हुए अमेरिका को आगे बढ़ाना चाहता है। अमेरिका की सरकार के विशेष दूत जॉन कैरी ने कहा कि चीन के साथ हमारे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर मतभेद हैं। संयुक्त राष्ट्र में बाइडन द्वारा नामित राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने चीन को अपने पड़ोसियों के लिए एक रणनीतिक बताया है। मौजूदा समय में चीन तीस फीसद उत्सर्जन करता है, जबकि अमेरिका में 15 फीसद है। यूरोप को भी ले लिया जाए तो इन तीनों ही स्थानों से विश्व का 55 फीसद उत्सर्जन हो जाता है। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि हमें साथ आकर इस समस्या हल करना चाहिए।

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जॉन कैरी ने कहा संयुक्त राष्ट्र में चीनी हमारे मूल्यों को और हमारी सुरक्षा को कम कर रहे हैं। वह न्यूयॉर्क में चीनी दुर्भावनापूर्ण प्रयासों के खिलाफ आक्रामक तरीके से काम कर रही है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र में बाइडन द्वारा नामित राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने चीन को अपने पड़ोसियों के लिए एक रणनीतिक खतरे की संज्ञा बताई है। उन्होंने सुरक्षा परिषद में चीनी प्रभाव के खिलाफ काम करना अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताई।

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