एमिसैट भारत का है अंतरिक्ष जासूस, दुश्मन के रडार पर रखेगा नजर

नई दिल्ली: भारत ने लो अर्थ ऑर्बिट में एक सैटेलाइट को ए-सैट मिसाइल से मार गिराने के पांच दिनों के बाद भारत ने सोमवार को एक सैटेलाइट लॉन्च किया है, जो दुश्मन के क्षेत्र में रडार का पता कर फाइटर जेट्स और स्पेसक्राफ्ट सहित कई संपत्तियों की रक्षा करेगा।

इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक इंटेलीजेंस सैटेलाइट (एमीसैट) रडार सिग्नल्स का पता करेगा और रडार के प्रकार और उसकी स्थिति का पता करेगा। बताते चलें कि रडार विशेष फ्रीक्वेंसीज की रेडियो तरंगों को छोड़ता है, जो टारगेट से टकराकर वापस आती हैं और बताती हैं कि उस रडार का प्रकार किस तरह का है और उसकी मूवमेंट व दूरी कितनी है।

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सैन्य उपग्रह एमीसैट के लांच होने से तीनों सेनाओं की ताकत में इजाफा होगा। इसकी मदद से सेनाएं सर्जिकल स्ट्राइक एवं बालोकोट जैसे सैन्य ऑपरेशनों को और बेहतर तथा सटीक तरीके से अंजाम देने में सफल होंगी। इस सेटेलाइट की मदद से सेनाएं पहले ही दुश्मन के रडार आदि उपकरणों की लोकेशन का पता लगा सकेंगी।

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एमीसैट को डीआरडीओ और इसरो ने आठ साल की मेहनत के बाद तैयार किया है। पृथ्वी की निचली कक्षा में इसे 749 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है। यहां से यह सैकड़ों किलोमीटर दूर धरती पर लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जासूसी करेगा।

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कहीं भी ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हों, जिनसे इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगें निकलती हो, तो उन्हें सेटेलाइट के जरिये मिनटों में चिह्नित किया जा सकेगा। डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक ने बताया कि एमीसैट स्पेक्ट्रम के आधार पर हमें बताएगा कि दूसरी तरफ किस तरह का रडार काम कर रहा है।

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इसके साथ ही यह हमारे एसेट्स और रडार के बीच की दूरी का पता करेगा। डीआरडीओ के चीफ सतीश रेड्डी ने कहा कि ए-सैट के बाद यह बड़ी उपलब्धि है। हम अपनी क्षमताओं को बढ़ाने में कामयाब हुए हैं और थोड़े ही समय में दो सफलताएं मिली हैं।

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रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपग्रह इजरायल के ‘सरल’ जासूसी उपग्रह की तर्ज पर विकसित किया गया है। इसे सैन्य जरूरतों के मद्देनजर बनाया गया है। हाल में मिशन शक्ति के तहत लांच की गई एंटी सेटेलाइट मिसाइल के बाद यह अंतरिक्ष में एक और बड़ी उपलब्धि है, जो सैन्य बलों को मजबूती प्रदान करती है।

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