महाराष्ट्र में एनसीपी पर भड़के अमित शाह, और कश्मीर मुद्दे पर कह दी इतनी बड़ी बात

कल महाराष्ट्र में  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एनसीपी और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. अमित शाह ने कहा कि दोनों ही पार्टियों में परिवारवाद का बोलबाला है. उन्होंने कांग्रेस को चेतावनी दी कि कश्मीर मुद्दे पर अपने विचार साफ़ रखें नहीं तो जनता इसका जवाब जरुर देगी.

क्या सोलापुर के नौजवानों को अधिकार नहीं है. पिछले पांच साल में देश में नरेन्द्र मोदी सरकार और महाराष्ट्र में देवेंद्र फणनवीस की सरकार चली,  इन दोनों की जोड़ी ने महाराष्ट्र को फिर से गौरव दिलाकर देश का नंबर एक राज्य बनाया है। ये पांच साल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एनसीपी के मुखिया शरद पवार पर हमला बोलते हुए कहा कि शरद पवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र में जब सरकार बनी तो 74,000 हजार करोड़ रुपये सिंचाई के लिए आवंटित किये लेकिन किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंचा. 

देवेंद्र फडणवीस सरकार ने 8,000 करोड़ रुपये सिंचाई के लिए दिये और आज 22,000 गांवों में पानी ही पानी है. इसे कहते हैं किसानों के लिए काम करने वाला नेता. यूपीए की सरकार ने भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं किया। इन्होंने करीब 12 लाख करोड़ रुपये के घपले घोटाले किये. आदर्श घोटाले को कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने अंजाम दिया.

शाह ने आगे कहा, मोदी की सरकार पिछले पांच साल चली, कोई भी एक रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप हम पर नहीं लगा सकता. मोदी की सरकार और सरकार पूरी पारदर्शिता से चली है. 

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और NCP के नेता शरद पवार महराष्ट्र की जनता को ये स्पष्ट करें कि आप अनुच्छेद 370 और 35A हटाने का समर्थन करते हो या नहीं. 

महाराष्ट्र में सत्ता की खींचतान एक संस्कृति बनकर रह गई थी. 1972 के बाद किसी मुख्यमंत्री ने यहां पांच साल पूरे किये हैं तो वो देवेंद्र फडणवीस ने किए हैं। इनके नेतृत्व में भाजपा और शिवसेना एकजुट है इस स्थिरता से विकास के काम हुए हैं.

शाह यहीं चुप नहीं हुए उन्होंने यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, यूपीए जब केंद्र में थी और यहां एनसीपी और कांग्रेस की सरकार थी तब 13वें वित्त आयोग में महाराष्ट्र को 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये दिए गए थे. मोदी जी की सरकार ने 14वें वित्त आयोग में महाराष्ट्र को 2,86,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की धनराशि दी है. कांग्रेस के जमाने में 100 पैसा भेजा जाता था तो 85 पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है. देवेन्द्र को 100 रुपये मिलते हैं तो वो 125 रुपये का काम करते हैं 25 रुपये जनभागीदारी से आते हैं.

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