कोर्ट के बाहर लोगों ने किया प्रदर्शन, कहा तारीख पर ताऱीख, आखिर कब बनेगा राम मन्दिर

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नई दिल्ली।  सुप्रीमकोर्ट में अयोध्या केश की सुनवाई एक बार फिर 29 जनवरी तक के लिए टल गई। गुरूवार को पांच जजों की बेंच से जस्टिस यूयू ललित ने खुद को अलग कर लिया है। अब पांच जजों की नई बेंच बनेगी। राम मन्दिर बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की सुनवाई गुरूवार को जैसे ही शुरू हुई। मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस ललित बतौर अधिवक्ता 1997 के आसपास अयोध्या से जुड़े केश ने यूपी के तत्कालीन के  सीएम कल्याण सिंह की ओर से पेश हुए थे।

बतौर सीएम सिंह अयोध्या में विवादित स्थल पर यथास्थिति रखने का आश्वासन पूरा करने में नाकाम हुए थे। बता दें कि अयोध्या विवादित ढ़ांचा 6 दिसंबर 1992 को गिराया गया था। हालांकि धवन ने कहा कि जस्टिस ललित सुनवाई चाहे तो कर सकते है। हमे आपत्ति नहीं इसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बताया कि जस्टिस ललित ने खुद को सुनवाई अलग कल लिया है।

अब नई बेंच बनेगी। राजीव धवन ने पांच जजों की नई बेंच बनाने पर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि पहले तीन जजों ने मामले को संवैधानिक बेंच को रेफर करने से मना किया था। अब प्रशासनिक आदेश पारित का संवैधानकि बेंच में मामले को लिया गया है। इसके लिए जुडिसियल आर्डर पास किया जाना चाहिए इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि पांच जजों को मामला भेजना का फैसला चीफ जस्टिस का प्रशासनिक फैसला है।

सुनवाई टालने की खबर आते ही सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया।

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