अन्ना के आन्दोलन से बैकफूट पर केंद्र सरकार, ख़त्म हुआ अनशन

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नई दिल्ली। पिछले साथ दिनों से लोकपाल में संसोधन और किसानों की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे आज अपना अनशन तोड़ दिया हैं। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भेजा गया ड्राफ्ट उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

अन्ना सत्याग्रह के प्रवक्ता जयकांत के अनुसार केंद्र सरकार ने लोकपाल में संसोधन की मांग को मान लिया है। अन्ना की ये मांग थी कि लोकपाल के तहत विधायक, सांसद, प्रधानमंत्री और मंत्रियों पर भी कारवाई की जाए। सरकार ने अन्ना की भरोसा दिलाया है कि जल्द ही लोकपाल की नियुक्ति की जाएगी।

जयकांत ने बताया कि कबिनेट ने अन्ना की मांगे मानने का एक प्रस्ताव पास किया है। जिसको अन्ना ने मान लिया है और साथ ही सरकार ये ये भी पूछा है कि मांगे कब तक पूरी होंगी। जयकांत ने ये भी कहा कि अन्ना ने सरकार को तीन माह का समय दिया है, मांगे पूरी ना होने पर अन्ना फिर से धरने पर बैठेंगे।

किसानों के मुद्दों पर जयकांत ने कहा कि सरकार ने कृषि मूल्य आयोग की घोषणा मान ली है। सरकार ने अन्ना को ये भी बता दिया कि किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना कीमत कैसी देगी। दूसरी ओर सरकार अन्ना की मांग पर चुनाव आयोग को ये प्रस्ताव भेजने को राजी हो गई है कि उम्मीदवार के फोटो को ही उसका चुनाव चिन्ह्र बनाया जाए।

आंदोलन के प्रवक्ता जयकांत मिश्रा की मानें तो केन्द्र सरकार अन्ना की ज्यादातर मांगों पर राजी हो गई है।

बता दें कि अन्ना हजारे 23 मार्च से अनशन पर हैं और गुरुवार को ये सातवें दिन में प्रवेश कर गया। उनके सहयोगी दत्ता अवारी ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने वाले अन्ना का वजन पांच किलोग्राम से ज्यादा घट गया है और अनशन की वजह से उनका रक्तचाप भी गिरा है।

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