बेबसी का दूसरा नाम है दिव्यांग Ali Abbas की जिंदगी, पेंशन और ट्राई साइकिल मिलने की गुहार

यूपी के जिले अंबेडकर नगर के जलालपुर में दिव्यांग अली अब्बास गरम सड़को पर घसीटने पर मजबूर है, सरकार से दिवयांग पेंशन और ट्राई साइकिल मिल जाए तो उसकी जिंदगी का गुजर बसर हो जाएगा

जलालपुर: यूपी के जिले अंबेडकर नगर के जलालपुर (Jalalpur) में मोहल्ला जाफराबाद में दिव्यांग अली अब्बास (Ali Abbas) की जिंदगी बेबसी का दूसरा नाम है। दरअसल कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के दौरान जलालपुर में सूनसान सड़को पर हाथ और पैर के बल पर गरम सड़कों पर घिसटते चलते अली अब्बास पर आम लोगों के अलावा जिम्मेदारों की निगाहें अक्सर पड़ती हैं लेकिन कोई रुक कर उसकी बेबसी और परेशानी सुनना नहीं चाहता है।

जानें पूरा मामला

दोनों पैर एंव दोनों हाथ से विकलांग अली अब्बास दूसरों के रहमोकरम पर जिंदगी का पहिया जबरदस्ती खींच रहा है। थके हारे इस बेबस के पास न तो ट्राई साइकिल (Tricycle) है और न ही 2 सालों से दिव्यांग पेंशन ही मिल रही है। 25 साल के अली अब्बास के सर से मां बाप का साया तो बहुत पहले ही उठ गया था इकलौता होने के कारण उसके सर पर हाथ रखने वाला कोई नहीं बचा। इस कठिन परिस्थितियों में अली अब्बास ने हार नहीं मानी और उसने उम्मीदों के चिराग जलाये रखा।

 

अली अब्बास अपनी कोशिश मेहनत और लगन से विकलांग प्रमाणपत्र बनवाया। जिसके बाद अली को  पेंशन भी मिलने लगी। लेकिन इधर 2 सालों से पेंशन बंद हो गयी तो उसके पेट पालने का जरिया सिर्फ सरकारी कोटे का राशन ही बचा। अन्य दैनिक जरूरतों के लिए उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। तेज गर्मी से गर्म सड़क हो या ऊबड़ खाबड़ गलियां अपने हाथों एंव पैरों के सहारे घिसट कर चलने से कई बार अली अब्बास के हाथ पैर रगड़ से जख्मी हो जाते हैं। ऐसी हालात में अली की जिंदगी शासन प्रशासन सहित स्वयं सेवी संस्थाओं के जरिये दिव्यांगों के प्रति सहानुभूति जताने वाले दावे की पोल खोलता नजर आ रहा है।

अली ने बताया आज कल चारों तरफ कोरोना महामारी के अलावा दूसरी समस्याओं की तरफ जिम्मेदारों का कोई ध्यान ही नहीं है। उसकी पेंशन चालू हो जाये और एक ट्राई साइकिल मिल जाये तो सरकारी अनाज के सहारे अली अब्बास की जिंदगी का गुजर बसर किसी तरह होता रहेगा।

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