कोई जगह, शहर छोटा हो सकता है लेकिन ख्वाब छोटा नहीं होता: फिल्म निर्देशक

पटना: बिहार पटना के मीठापुर के एक बेहद साधारण मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वाले धीरज कुमार (Dhiraj Kumar) को बचपन से ही सिनेमा देखने‌ का बहुत शौक था, मगर सरकारी नौकरी करने वाले बाबूजी को सिनेमा देखने में कोई दिलचस्पी नहीं थी।

ऐसे में नन्हा धीरज अक्सर अपनी मां के साथ पटना के सिनेमाघरों में फिल्में देखने जाया करता था। सिनेमाघर के अंधेरे हॉल में हर फिल्म के साथ धीरज के मन में सिनेमा की दुनिया में कदम रखने की इच्छा होने लगी थी।

धीरज पटना जैसे शहर में एक साधारण परिवार से होते हुए भी एक दिन बॉलीवुड में फिल्में बनाने का ख्वाब देखने‌ लगे थे। नन्हें धीरज की उससे भी बड़ी समस्या ये थी कि वो अपने‌ पैरों से लाचार थे, क्योंकि वो बचपन से ही पोलियो का शिकार थे। ऐसे में उन्हें कहीं आने-जाने, चलने-फिरने में ही दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता था, लेकिन उन्हें आते-जाते उपहास का पात्र बना दिया गया था।

ऐसे में धीरज के लिए मुंबई में आकर बॉलीवुड में फिल्म बनाने का सपना देखना भी उनके हैसियत के बूते की बात नहीं थी। मगर धीरज कुमार ने कभी हिम्मत नहीं हारी। आज धीरज का जन्मदिन है उस पर खास जानकारी उस से जुडी हुई।

सबसे पहले तो उन्होंने बड़ी मेहनत से अपने‌ पोलियोग्रस्त पैरों के सहारे सहजता से चलना-फिरना सीखा और लोगों की उलाहना देती नजरों के बीच हमेशा अपने हौसला को बनाये रखा। फिल्म बनाने का ख्वाब लेकर मुंबई आए तो उनकी मुलाकात ‘आशिकी’ स्टार राहुल रॉय से हुई।

उन्हें फिल्म की कहानी सुनाई तो राहुल रॉय ने उनकी पहली भोजपुरी फिल्म ‘ऐलान’ को प्रोड्यूस करने का फैसला किया, जिसमें मनोज तिवारी के साथ वो खुद ही हीरो भी थे. इस तरह से धीरज ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा।

 

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