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‘किसी भी संवाद का आधार है विश्वास’

Sushma Swaraj at a press conferenceनई दिल्ली विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की रुकी हुई वार्ता को फिर से शुरू करने का मुख्य आधार ‘विश्वास’ है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच अब आगे से आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर पर बातचीत होगी। पाकिस्तान के साथ वार्ता प्रक्रिया शुरू करने पर लोकसभा में सांसदों के सवालों-संशयों का उत्तर देने के दौरान सुषमा ने यह बात कही।

उन्होंने कहा, “जब कभी बात होती है, यह सद्भाव पर आधारित होती है।” इससे पहले सुषमा ने सदन में अपनी 8-9 दिसंबर की पाकिस्तान यात्रा पर औपचारिक बयान दिया था। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ्ती ने पूछा कि जब भारत जम्मू एवं कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता है तो फिर इस पर बात क्यों हुई। सुषमा ने कहा कि दोनों देशों ने राज्य के संदर्भ में आतंकवाद पर बात की। किसी तरह के राजनैतिक पहलू पर बात नहीं हुई।

पक्ष-विपक्ष के कई सांसदों की चिंता को दूर करते हुए सुषमा ने कहा कि किसी तीसरे देश में बातचीत करने का अर्थ यह नहीं है कि भारत और पाकिस्तान ने अपनी वार्ता प्रक्रिया में तीसरे पक्ष की दखलंदाजी की इजाजत दे दी है। मीडिया के एक हिस्से में पाकिस्तान से वार्ता को ‘नीति में अचानक बदलाव’ बताए जाने पर सुषमा ने कहा, “रणनीतिक वार्ता की जटिलताओं में ऐसे ही आगे बढ़ना पड़ता है। यह अचानक बदलाव नहीं है। यह रणनीतिक महत्व का मामला है।”

इस्लामाबाद में सुषमा द्वारा उर्दू में अपनी बात रखने और हरी साड़ी पहनने पर भी सवाल उठे। उन्होंने कहा, “उर्दू मेरे देश की भी भाषा है।” उन्होंने पलटकर पूछा कि इस्लामाबाद में पाकिस्तानी मीडिया से उर्दू में बात करने में बुराई क्या है। सुषमा ने कहा कि वह आम तौर से बुधवार को हरी साड़ी पहनती हैं। उस दिन बुधवार था, इसलिए उन्होंने हरी साड़ी पहनी थी। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के परिवार की चार पीढ़ियों से मुलाकात के बारे में कहा, “विदेश नीति में इन बातों का महत्व होता है।”

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