Cyrus Mistry के शेयरों का कौड़ी के भाव इवैल्यूएशन करना TATA की मनमर्जी जैसा!

नई दिल्ली: टाटा संस और Cyrus Mistry के बीच खिंची लकीर में बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने टाटा के पाले में फैसला सुनाया था। 70 सालों से ज्यादा पुराने टाटा संस और साइरस मिस्त्री के रिश्ते के बीच आयी रार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला साइरस मिस्त्री के घाव को और गहरा करने वाला है। 100 कम्पनियों से ज्यादा की ओनरशिप रखने वाले टाटा ग्रुप में 18.37 % की हिस्सेदारी रखने वाले साइरस मिस्त्री के शायरों का कौड़ी के भाव इवैल्यूएशन लगाना टाटा की मनमर्जी जैसा है। इसपर कोर्ट का फैसला कहीं न कहीं साइरस मिस्त्री के आत्मबल को गिराने वाला है। मिस्त्री 27 दिसंबर, 2012 से 24 अक्टूबर, 2016 तक नमक से लेकर सॉफ्टवेयर क्षेत्र में कार्यरत टाटा उद्योग समूह के चेयरमैन थे।

Cyrus Mistry दूसरे ऐसे चेयरपर्सन थे जिनके नाम के आगे टाटा Surname नहीं था। टाटा ग्रुप से पहले साइरस मिस्त्री 1991 में शापूरजी पल्लोनजी एंड कम्पनी के निदेशक मंडल में शामिल होकर Business की दुनिया में कदम रखा। लगतार वे Business tycoon की तरह वे काम कर रहे थे। ऐसे में बे 2008 के बाद से Tata group के Business में Unofficial सलाहकार के रूप में भी थे।

Cyrus Mistry ने तय किया था 500 अरब डॉलर का टारगेट

उनकी अच्छे Business नजरिये के कारण रतन टाटा ने उन्हें दिसंबर, 2012 में टाटा ग्रुप का चेयरमैन बना दिया। उस समय कम्पनी का कारोबार 100 अरब डॉलर था। 500 अरब डॉलर का टारगेट साइरस मिस्त्री ने 2022 तक तय किया था। लेकिन 2016 में कुछ मतभेदो के कारण उन्हें निदेशक पद से हटा दिया गया। साइरस का मानना था टाटा मोटर्स के Low Business का कारण उनका छोटी Vehicle नैनो है जिसे बंद करना कम्पनी के लिए लाभप्रद होगा। वहीँ इंडियन होटल्स को लेकर भारत और विदेश के व्यवसायों पर भी राय पर मतभेद था।

मैंने पूरी ईमानदारी से काम किया : Cyrus Mistry

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Cyrus Mistry का ब्यान आया है। उन्होंने कहा कि मुझमें कई कमियां हो सकती हैं, लेकिन Group के लिए मैंने जो दिशा चुनी थी, उसको लेकर मुझे कोई संदेह नहीं है। मैंने पूरी ईमानदारी से काम किया। लेकिन उन्होंने टाटा ग्रुप में अपनी 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी निकालने को लेकर अपने अगले कदम का कोई उल्लेख नहीं किया। हो सकता है साइरस मिस्त्री शेयर बेचने के अपने फैसले को यहाँ बदल भी दें जो भविष्य में उनके लिए Profitable साबित हो सकता है।

ऐसे में एक बात जो टाटा ग्रुप के नजरिये से समझी जाये तो गले से उतरने वाली नहीं है। टाटा स्टील बीते 6 महीने में 100% से ज्यादा के मुनाफे में है। टाटा मोटर्स भी 100 % से ज्यादा के प्रॉफिट में है। टाटा chemicals, टाटा पावर, टीसीएस, टीसीपी समेत ऐसी तमाम टाटा की कम्पनिया जो कम नहीं अच्छे खासे प्रॉफिट में हैं उसके बाद भी साइरस मिस्त्री के 1.75 लाख करोड़ का इवैल्यूएशन मात्र 80 हजार करोड़ से कम रखा गया है। ऐसे में ये एक इन्वेस्टर की तौहीन नहीं तो क्या है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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