भोपाल गैस त्रासदी में विधवाओं को पेंशन योजना के अतिरिक्त 1,000 रुपये की स्वीकृति

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने भोपाल गैस त्रासदी में दिवंगत व्यक्तियों की जीवित विधवाओं के लिए सामाजिक पेंशन योजना के अतिरिक्त 1,000 रुपये की पेंशन दिए जाने की स्वीकृति दी है

भोपाल: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) कैबिनेट ने आज भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) में दिवंगत व्यक्तियों की जीवित विधवाओं के लिए सामाजिक पेंशन योजना के अतिरिक्त 1,000 रुपये की पेंशन दिए जाने की स्वीकृति दी है। इसकी जानकारी मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने दी है।

भयानक औद्योगिक दुर्घटना

भोपाल में 3 दिसंबर 1984 को एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई। जिसे भोपाल गैस कांड या भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से एक जहरीली गैस का रिसाव हुआ जिससे लगभग 15000 से अधिक लोगों की जान गई और बहुत सारे लोग अनेक तरह की शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए। भोपाल गैस काण्ड में मिथाइलआइसोसाइनाइट (MIC) नामक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था।जिसका उपयोग कीटनाशक बनाने के लिए किया जाता था। मरने वालों के अनुमान पर विभिन्न स्त्रोतों की अपनी-अपनी राय होने से इसमें भिन्नता मिलती है। फिर भी पहले अधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 2,259 थी।

गैस से फैली बीमारियों के शिकार

मध्यप्रदेश की तत्कालीन सरकार ने गैस से मरने वालों के रूप में पुष्टि की थी। अन्य अनुमान बताते हैं कि 8000 लोगों की मौत तो दो सप्ताहों के अंदर हो गई थी और लगभग अन्य 8000 लोग तो रिसी हुई गैस से फैली संबंधित बीमारियों से मारे गये थे। 2006 में सरकार द्वारा दाखिल एक शपथ पत्र में माना गया था कि रिसाव से करीब 558,125 सीधे तौर पर प्रभावित हुए और आंशिक तौर पर प्रभावित होने की संख्या लगभग 38,478 थी।

भोपाल गैस त्रासदी को लगातार मानवीय समुदाय और उसके पर्यावास को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली औद्योगिक दुर्घटनाओं में गिना जाता रहा। इसीलिए 1993 में भोपाल की इस त्रासदी पर बनाए गये भोपाल-अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को इस त्रासदी के पर्यावरण और मानव समुदाय पर होने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को जानने का काम सौंपा गया था।

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