आधी-अधूरी तैयारी के साथ हरिद्वार में शुरू हुआ अर्द्धकुंभ

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हरिद्वार। अर्द्धकुंभ की औपचारिक शुरुआत आज से हो गयी है। लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य ऐसे हैं जो पूरे नहीं हो सके हैं। इनमें चाहे हिल बाईपास निर्माण का काम हो या फिर हरकी पैड़ी, हिबहाइवे और ललतारो पुल का निर्माण कार्य, सब अधर में ही हैं। मेला प्रशासन शुरू से दावा कर रहा था कि अर्द्धकुंभ के सभी कामों को तय समय सीमा यानी 31 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन सुस्त और उदासीन सरकारी मशीनरी के चलते अधर में अटके हुए हैं और सारे दावों की पोल भी खोल रहे हैं।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि मेला प्रशासन केवल 14 अप्रैल के स्नान को ही स्नान मान रहा है बाकी स्नानों को नहीं। हरिद्वार की मौजूदा हालत देखकर नहीं लगता कि कोई भी काम समय से पूरा हो सकेगा। अर्द्धकुंभ मेलाधिकारी एस मुरुगेसन भी मानते हैं कि कुछ कामों में विलम्ब जरूर हुआ है, लेकिन सभी काम तेजी से कराए जा रहे हैं और स्नान से पहले उन्हें हर हाल में पूरा कर लिया जायेगा।

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श्रद्धालुओं के स्‍वागत को तैयार होटल, धर्मशाला और मठ

अर्द्धकुंभ के दौरान बाहर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए होटल, धर्मशालायें और मठ पूरी तरह से तैयार हैं। वहीं मेला पुलिस ने भी होटल और धर्मशाला संचालकों से सहयोग की अपील की है। कुम्भ मेले को हरिद्वार के व्यापारी आन, बान और शान का प्रतीक मानते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के साथ ही यहां आ रही जनता की भी है। आतंकी घटनाओं के चलते होटल, धर्मशाला संचालकों को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। लोगों का ये भी कहना है कि पुलिस और आम जनता में तालमेल होना बहुत जरूरी है।

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वहीं अर्द्धकुंभ मेला डीआईजी जीएस मार्तोलीया का कहना है कि होटल और धर्मशाला संचालकों को सुरक्षा संबंधी सभी निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए सभी स्थानों पर रुट मैप भी लगाये जाएंगे जिससे लोगों को स्नान में कोई दिक्कत न हो।

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कब-कब होने हैं महत्वपूर्ण स्नान
मकर संक्रांति – 14 जनवरी

मौनी अमावस्या – 8 फरवरी
बसंत पंचमी – 12 फरवरी
माघ पूर्णिमा – 22 फरवरी
श्राद्ध अमावस्या – 8 मार्च
चैत्र अमावस्या – 7 अप्रैल
नव संवत्सर – 8 अप्रैल
बैसाख – 14 अप्रैल
रामनवमी – 15 अप्रैल
चैत्र पूर्णिमा – 22 अप्रैल

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