सेना ने कर डाली ‘राजनीतिक एजेंडा’ पर ही एयर स्ट्राइक

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बीते कई दिनो से लोकसभा चुनाव के चलते राजनीतिक पार्टिया अपने ज्यादा से ज्यादा प्रचार में लगी हुई है. चुनावी रैलिया, बड़े बड़े बैनर से लेके छोटे मोटे पोस्टर्स. फ़ूड पैकेट्स से लेके ट्रेंडी टीशर्ट, फिल्मों से लेकर टीवी सीरियल तक, जहां तक देखो शहर से लेकर ग़ाव सब चुनावी प्रचार की बाढ़ में डूबे मालूम होते है. यहाँ तक तो जनता ने झेल लिया, ऐसी चिलमिलाती गर्मी में विभिन्न रोड शो और रैलियों में जाकर तालिया बजाकर, राजनीतिक दलों का प्रोत्साहन भी किया.

पर हद तो तब हो गयी जब ये राष्ट्रवादी राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितो के लिए सेना(जो की है सिर्फ और सिर्फ देश को समर्पित होती है) उसपर भी कॉपीराइट करने पर आए.

ये सुनिए कुछ हैरान कर देने वाले विवादित बयान-

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी अदित्यानाथ ने विपक्ष पर निशाना साधने के चक्कर में खुद को ही घायल कर लिया.

उनकी माने तो हमारी भारतीय सेना ‘मोदी जी की सेना है’, वो सेना को अपनी भी नही मानते ना ही बीजेपी की, उनकी राजनीती में सेना सर्फ ‘मोदी की सेना’ है. बाकी किसी का कोई अधिकार सेना पर नही है. या यूं कहें की बाकी किसी को अधिकार नही सेना के नाम पर वोट मांगने का.

हालांकि, चुनाव आयोग ने सख्त कार्यवाही के चलते एक छोटा-मोटा नोटिस भेजा है.

लेकिन ये नोटिस भेजने की कार्यवाही कितनी सख्त है ये इस बात से पता चलता है कि,

पीएम मोदी ने हाल ही में सेना को फिर चुनावी हित के घेरे में लेते हुए कहा,” बालाकोट में हुए एयर स्ट्राइक करने वाले जवानों को अपना वोट समर्पित करेंगे क्या?”..

इस बयान को इतनी चालाकी से लिखा गया है की चुनाव आयोग की नज़रों से बचते हुए प्रोपेगेंडा भी हो जाये और सवाल भी खड़े ना हो.

लेकिन ऐसे बयानों पर अगर हमारा चुनाव आयोग कुछ नही कर पाया तो सेना ने इस ‘प्रोपेगेंडा’ से खुद की रक्षा करने का ज़िम्मा खुद ही उठा लिया.

राष्ट्रपति को पत्र लिख कर इस गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान ले जाने वालों में पूर्व जनरल एसएफ रोड्रिग्स, पूर्व जनरल शंकर राय चौधरी, पूर्व जनरल दीपक कपूर और पूर्व वायुसेना प्रमुख एनसी सूरी शामिल हैं. राष्ट्रपति को लिखे पत्र में पूर्व सैन्य अफसरों ने शिकायत की है कि सेना देश की है किसी पार्टी की नहीं. पत्र में नेताओं की ओर से सैन्य पराक्रम का श्रेय लेने का विरोध जताया गया है. सैनिको ने ये भी कहा है – चुनावी हित के लिए सेना किसी का एजेंडा नही.

राष्ट्रवादी दलों से अब हम भारत वासी इतनी उम्मीद तो कर ही सकते है की वो हमारी और हमारी भारतीय सेना की उम्मीदों पर खरे उतरने की कोशिश तो कर ही सकते है.

(तुबा)

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