जम्मू-कश्मीर : राज्यपाल शासन से सेना को मिला बल, अब आतंकियों को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में भाजपा द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी‌) की सरकार गिर गई। वहीं यह भी बात सामने आई किसी भी अन्य गठबंधन के भी कोई आसार नहीं हैं। इन स्थितियों को देखते हुए राज्य में 24 घंटे के अंदर राज्यपाल शासन लगा दिया गया है। सरकार गिरने के बाद ही मंगलवार शाम को राज्यपाल एनएन वोहरा ने राज्यपाल शासन लगाने के लिए राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजी थी। वहीं मामले पर तुरंत प्रतिक्रया देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार सुबह इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की मंजूरी दी।

महबूबा के इस्तीफे के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू

जम्मू कश्मीर

बता दें इसी महीने वोहरा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में परिस्थियों को देखते हुए अमरनाथ यात्रा खत्म होने तक वे गवर्नर पद पर बने रह सकते हैं। अमरनाथ यात्रा 28 जून से 26 अगस्त तक चलेगी।

वहीं राज्य के डीजीपी एसपी वैद इस फैसले से काफी खुश नज़र आए। उन्होंने कहा कि जिन परिस्थियों में सेना के हाथ बंधे हुए थे, अब उनसे आजादी मिल चुकी है। ऐसे में वे आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाना काफी आसान हो जाएगा।

खबरों के मुताबिक़ डीजीपी एसपी वैद ने बताया कि कश्मीर में रमजान के दौरान आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन पर रोक लगाई गई थी।

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आतंकियों को इससे काफी फायदा मिला है। इस वजह से आतंकी घटनाओं में इजाफा हुआ, लेकिन अब यह रोक हट गई है। आगे आतंकियों के खिलाफ और भी मजबूत ऑपरेशन चलाए जाएंगे।

राइजिंग कश्मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी की हत्या पर वैद ने कहा कि हमने एसआईटी का गठन किया है। पुलिस इस मामले को जल्द ही सुलझा लेगी।

आर्मी के शहीद जवान औरंगजेब के बारे में उन्होंने कहा कि हत्या करने वाले आतंकियों की पहचान हो गई है। जल्द ही हम उन तक पहुंच जाएंगे।

बता दें राज्य में पिछले 10 साल में यह चौथी बार राज्यपाल शासन लगा है। पीडीपी और भाजपा के बीच सवा तीन साल पहले गठबंधन हुआ था।

भाजपा ने मंगलवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी से गठबंधन तोड़कर महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

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कांग्रेस और पीडीपी ने एकदूसरे के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने भी किसी गठबंधन की संभावना से इनकार किया है।

गठबंधन तोड़ने की वजहों पर ध्यान दिया जाए तो रमजान के दौरान सुरक्षाबल आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन रोक दें, इसे लेकर भाजपा-पीडीपी में मतभेद थे।

महबूबा के दबाव में केंद्र ने सीजफायर तो किया लेकिन इस दौरान घाटी में 66 आतंकी हमले हुए, पिछले महीने से 48 ज्यादा।

ऑपरेशन ऑलआउट को लेकर भी भाजपा-पीडीपी में मतभेद था। वहीं पीडीपी चाहती थी कि केंद्र सरकार हुर्रियत समेत सभी अलगाववादियों से बातचीत करे। लेकिन, भाजपा इसके पक्ष में नहीं थी।

मामले में राम माधव ने कहा, ‘‘घाटी में आतंकवाद, कट्टरपंथ, हिंसा बढ़ रही है। ऐसे माहौल में सरकार में रहना मुश्किल था। रमजान के दौरान केंद्र ने शांति के मकसद से ऑपरेशंस रुकवाए। लेकिन बदले में शांति नहीं मिली। जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के बीच सरकार के भेदभाव के कारण भी हम गठबंधन में नहीं रह सकते थे।’’

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