दहशत पनपने से पहले ही सेना काट देगी जड़ें, मातम के लिए भी तरसेंगे आतंकी

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में भाजपा के समर्थन लेने के बाद से ही सेना के बंधे हाथ एक बार फिर खुल गए हैं। आतंकियों को करारा जवाब देने के लिए ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ चलाया जा रहा है। इसके तहत सेना मोस्टवांटेड आतंकियों को चुन-चुन कर निशाना बनाएगी। आतंकियों के सफाए के लिए सेना ने 22 आतंकियों की लिस्ट बनाई है। इनमें से एक को सेना पहले ही मार चुकी है। अब टारगेट प्वाइंट पर 21 आतंकी बाकी रह गए हैं। इसके साथ ही सेना ने एक और अहम फैसला लिया है। इसके मुताबिक़ अब सेना मारे गए आतंकियों की बॉडी उनके परिजनों को वापस नहीं करेगी।

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ऑपरेशन ऑलआउट

खबरों के मुताबिक़ इंडियन आर्मी ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत मुठभेड़ में मारे गए टॉप आतंकियों के शव उनके परिजनों को नहीं सौंपे जाएंगे। सेना जैश, लश्कर और आईएसआईएस आतंकियों के शव उनके परिजनों को नहीं सौपेगी। हालांकि इन्हें किसी सुनसान जगह पर दफन किया जाएगा।

सेना के इस फैसले के पीछे एक कारण यह भी है कि आतंकियों के सुपर्द-ए-खाक के दौरान हाजारों के तादाद में स्थानीय लोग वहां मौजूद होते हैं। जहां हथियारबंद आतंकी लोगों को अपने भाषण से उन्हें आतंक की ओर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।

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वहीं इसी अभियान के तहत बीते शुक्रवार (22 जून, 2018) को सेना ने इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर (ISJK) के चीफ सहित उसके सहयोगियों को अनंतनाग जिले के श्रीगुफवारा और बिजबेहरा में मार गिराया।

मारे गए आंतकी की पहचान दाऊद के रूप में की गई। मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी और एक नागरिक की भी मौत हो गई। इसमें एक महिला भी जख्मी हो गई।

पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने बताया कि श्रीगुफवारा में हुई मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गए। उनका शव बरामद कर लिया गया है।

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में आंतकवादियों के मौजूद होने की विशेष खुफिया सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने दक्षिणी कश्मीर के इस जिले में श्रीगुफवारा क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया था।

तलाशी अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। जवाब में जवानों ने भी गोलीबारी की।

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