माउंट एवरेस्ट चढ़ने वाली अरुणिमा सिन्हा नहीं कर पाईं महाकाल के दर्शन, विकलांगता का उड़ाया गया मजाक

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नई दिल्ली। कृत्रिम पैर के दम पर माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली जानी-मानी पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया जिसके बाद बवाल मच गया है। उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने पहुंची अरुणिमा को बिना दर्शन किए ही वापस आना पड़ा और अपनी विकलांगता के कारण बेहद ज़िल्लत भी सहनी पड़ी।

दरअसल, सुबह 5 बजे उज्‍जैन के महाकाल मंदिर दर्शन के लिए गईं। चूंकि वो मंत्री कि मेहमान थीं, लिहाज़ा मंदिर प्रशासन को अरुणिमा के आने के बारे में पहले ही बता दिया गया था। जब अरुणिमा वहां पहुंची और मंदिर के अंदर जाने लगीं तो मंदिर के कर्मचारियों ने उन्हें यह कह कर रोक दिया कि वो लोअर, टी-शर्ट और जैकेट पहन कर मंदिर के अंदर नहीं जा सकतीं। अरुणिमा बताती हैं कि हालांकि वहां मंदिर के अंदर जाने के लिए किसी ड्रेस कोड को बारे में मंदिर में उन्हें कुछ भी लिखा हुआ नहीं दिखा। इसके अलावा अरुणिमा दिव्यांग हैं और उनके पैर कृत्रिम हैं, लिहाज़ा उन्हें इन कपड़ों में ठंढ के दिनों में पैरों में आराम मिलता है। अरुणिमा ने सारी बात वहां मंदिर कर्मियों को समझाने कि पूरी कोशिश भी की पर किसी ने उनकी बातों को अहमियत नहीं दी।

भावुक अरुणिमा कहती हैं कि ‘जब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर जाने से भगवान ने नहीं रोका लेकिन यहां भगवान के दर्शन करने से इंसानों ने रोक दिया। भगवान शंकर के दर्शन करने जब मैं महाकाल गई तो जो कुछ मुझे सहना पड़ा, वो मेरे लिए बहुत बुरा अनुभव था। मैं भगवान शिव कि भक्त हूं और महाकाल मंदिर पहुंच कर भी भगवान के दर्शन मैं नहीं कर पाऊंगी, ये सोच कर मेरी आखों में आसूं आ गए। मैंने थोड़ी जिद की तो उन्होंने महिला पुलिसकर्मी को बुला लिया और मुझे जताया गया कि अगर और मैंने और जिद कि तो वो मुझे धक्का देने से भी नहीं चूकेंगे। आखिरकार, गर्भगृह तक गए बिना ही मुझे वापस जाना पड़ा। हालांकि बाद में मंदिर प्रशासन ने मुझे फ़ोन कर पूरी घटना पर खेद भी जताया।

अरुणिमा के इस ट्वीट को लेकर कई तरह के कमेन्ट आ रहे हैं। कुछ लोग उज्जैन महाकाल की व्यवस्था को कोस रहे हैं तो कुछ इसे उनकी ही गलती बता रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि मंदिर में मोटा पैसा लेकर धन्ना सेठों, नेताओं, मंत्री को एंट्री दी जाती है, लेकिन आम आदमियों को जूझना पड़ता है।

अरुणिमा ने अपने इस ट्वीट में पीएमओ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को भी टैग किया था। जिसके बाद मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह ने दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट पर लिखा है कि उनको इस पर बेहद अफसोस है। इस घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं। आप देश का गौरव हैं, भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में आपका स्वागत है।

राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी रह चुकीं सिन्हा के अपंग होने की कहानी दुखद होने के साथ ही उनकी बहादुरी के बारे में बताती है। अप्रैल, 2011 में एक ट्रेन यात्रा के दौरान लुटेरों ने उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया जिसमें उन्होंने घुटने के नीचे से अपना एक पैर गवां दिया। इसके दो साल बाद उन्होंने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया और देश की पहली दिव्यांग पर्वतारोही बन गईं जिसने एवरेस्ट फतह किया है।

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