चुनाव से पहले दिल्ली वालों के बीच पहुंची केजरीवाल सरकार, सिसोदिया ने लिखा खत

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग द्वारा आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की थी। जिसके बाद राष्ट्रपति द्वारा आप के इन विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इन विधायकों पर लाभ के पद पर होने का आरोप लगा था। इस मामले की पूरी सच्चाई दिल्ली की जनता को बताने के लिए यहां के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने शहर के लोगों के नाम एक खुला खत लिखा है। इस खत के जरिए सिसोदिया ने केन्द्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अलावा दिल्ली वासियों से 20 सीटों पर फिर से होने वाले उपचुनाव में सहयोग करने की अपील की है।

सिसोदिया ने केन्द्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर गंदी राजनीति का आरोप लगाया है। सिसोदिया ने खत में लिखा केंद्र सरकार ऐसा पहली बार नहीं कर रही है। तीन सालों में केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 18 विधायकों के खिलाफ झूठे मुकदमे लगाकर गिरफ्तार किया गया। बाद में कोर्ट ने सबको रिहा कर दिया। सीएम केजरीवाल पर सीबीआई की रेड करवा दी, लेकिन वहां कुछ नहीं मिला। पार्टी के विधायकों को करोड़ों रुपये में खरीदने की कोशिश की गई।

सिसोदिया ने कहा बर्खास्त विधायक कर रहे थे बिना किसी लाभ के काम

सिसोदिया ने खत में दिल्ली वालों को लिखा है कि तीन साल पहले आपने 70 में से 67 विधायक चुनकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनाई थी। लेकिन इन्होंने आपके 20 विधायक बर्खास्त कर दिए. इन विधायकों पर ‘लाभ के पद’ पर रहने का आरोप है। सिसोदिया ने लिखा हमने इन 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था।

इन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां दी थीं। जैसे एक विधायक को सरकारी स्कूलों की जिम्मेदारी दी। वो रोज सरकारी स्कूलों में जाता था। देखता था कि टीचर आए हैं, सबकुछ ठीक चल रहा है। जहां जरूरत होती थी, वहां एक्शन लेता था। इसी तरह 20 विधायकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी थीं। बदले में इन विधायकों को कोई सरकारी गाड़ी, बंगला या वेतन के तौर पर कोई पैसा नहीं दिया। जब इनको कुछ मिला ही नहीं तो ये लाभ का पद कैसे हो गया।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि जब विधायकों पर आरोप लगा। तो विधायकों ने चुनाव आयोग से कहा कि उन्हें अपनी बात कहने का मौका दिया जाए। अगर उन्हें मौका दिया जाता तो वो साबित कर देते कि उन्होंने कोई लाभ नहीं लिया। चुनाव आयोग ने इन विधायकों को 23 जून को पत्र लिखकर पक्ष रखने के लिए तारीख देने की बात तो कही. लेकिन न तारीख दी गई और न उनका पक्ष सुना गया।

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