भारत के स्पिनोज़ा हैं असम के देबनाथ क्यूंकि बेहद दिलचस्ब है इनकी “HYPOTHESIS”

लखनऊ : इस पूरी दुनिया के सृजन से लेकर आज तक जितनी दिलचस्ब मौत की पहेली रही है उतनी ही पेंचीदा रही है टाइम ट्रेवल की गुत्थी। इस कड़ी में असम के सिल्चर के रहने वाले ह्रदय देबनाथ ने एक HYPOTHESIS पेश की है जिससे शायद इन पेंचीदा रहस्यों की परतें खुल जाएं।

कई अनोखे मुद्दों पर बात करती है HYPOTHESIS

हाइपोथिसिस के अनुसार देबनाथ का कहना है कि महान अंतरिक्ष में पाए जाने वाले ब्लैक, वाइट और वर्म होल, जो हर तत्व के अंत और उसे असीम रफ़्तार देने का माद्दा रखते हैं वह हमारे भीतर भी हो सकते हैं। अपने कथन को साबित करने के लिए देबनाथ दलील देते हैं की हम सब के अंदर एक एनर्जी होती है जिसे आम ज़बान में आत्मा कहा जाता है। और जब इसी एनर्जी को हमारे अंदर का ब्लैक होल लील लेता है तो शरीर की मृत्यु हो जाती है।

देबनाथ की इस हाइपोथिसिस का दूसरा अंश टाइम ट्रेवल के मुद्दे पर बात करता है। इस पर बात करने से पहले आपको बताते चलें की महान वैज्ञानिक और मेटा फिजिक्स के जानकार आइंस्टाइन ने कहा था कि कोई भी तत्व तभी वक़्त की सैर कर सकता है जब वह समय और आयाम के बंधन को तोड़ दे। इस पर देबनाथ का कहना है कि हम वक़्त की सैर रोज़ाना करते हैं अपनी पर्सनल ह्यूमन टाइम मशीन जिसे ब्रेन कहा जाता हैं। देबनाथ के अनुसार हमारे सपने हमारी वक़्त की यात्रा जैसे होते हैं क्यूंकि वह सब दिमाग में हो रहा होता है जो न्यूरॉन से बना है। जो रौशनी की स्पीड से जो की तीस लाख मीटर प्रति सेकंड होती है, इनफार्मेशन को ट्रांसफर करते हैं।

बचपन के सफर से सुलझेगी HYPOTHESIS की पहेली

हाइपोथिसिस के आगे के पहलुओं को समझने के लिए आप को मेरे साथ बचपन के सफर पर चलना होगा। हमें उस याद तक लौटना होगा जब आप छठी क्लास में थे। जब फिजिक्स के पाठ में एक सबख था कंज़र्वेशन ऑफ़ एनर्जी जिसके मुताबिक ऊर्जा ना तो बनती है, और न तो तबाह होती है।

इसी सिद्धांत को बुन्याद बनाकर देबनाथ कहते हैं की आत्मा को लीलकर जब हमारे अंदर का ब्लैक होल बिखरता है तो उससे हॉकिंस रेडिएशन निकलती हैं। अपनी बात को साबित करने के लिए देबनाह कहते हैं कि इसलिए अगर किसी मृत शरीर को कांच के डिब्बे के नीचे रखा जाए, तो ऊर्जा के बढ़ने से शायद उसमें विस्फोट हो सकता है।

अब अगर देबनाथ की इस  दलील को हम वैज्ञानिक नज़रिये से टटोल कर देखें तो पता चलेगा की यह बेहद मुमकिन है की मृत शरीर में विस्फोट हो जाएगा। लेकिन इस की वजह हॉकिंस रेडिएशन नहीं बल्कि हमारे अंदर मौजूद बैक्टीरिया हैं। जो बिना ऑक्सीजन के साँस लेने की वजह से मीथेन पैदा करते हैं जो इस विस्फोट का सबब बनती है।

इस के साथ साथ देबनाथ की हाइपोथिसिस ग्रेविटी जैसे पेंचीदा मसलों पर भी बात करती है। देबनार्थ के अनुसार हर जीवित तत्व की बुनयाद कोशिका है। साइंस के दूसरे पहलु केमिस्ट्री की नज़र से देखें तो पता चलता है की हर तत्व चाहे वह जीवित हो या नहीं उस की बुन्याद एटम होते हैं। इस तरह साबित होता है की हर तत्व की बुनयाद एटम होते हैं। देबनाथ आगे बताते हैं कि यह तत्व जिन्हें एटम कहा गया है ब्रह्माण्ड के हर आयाम में मौजूद हैं यहाँ तक की ब्लैक, वाइट होल में भी। चूंकि, कण ब्लैक होल के साथ-साथ ब्रह्मांड में भी मौजूद होते हैं और हमारी प्रकृति में मौजूद हर चीज भी उन्हीं समान कणों द्वारा निर्मित होती है। इसलिए, ब्लैक-व्हाइट-वर्म होल शायद हमारे शरीर में पूरी तरह से मौजूद हैं।

मेटाफिजिक्स पर बेस्ड है यह HYPOTHESIS

इसके साथ साथ टाइम ट्रेवल के मुद्दे को समझने के लिए देबनाथ लुसिड ड्रीमिंग नाम के विचार का सहारा लेते हैं। आपकी जानकारी के लिए आसान शब्दों में बताते चलें की लुसिड ड्रीमिंग उस स्वप्न अवस्था को बोलते हैं जब सपने देखने वाला शख्स अपने सपनों को काबू कर लेता है। उन्हें बदल मोड़ लेता है। सपने के हर पहलु पर जब सोते हुए इंसान का काबू हो जाता है उस सपने को लुसिड ड्रीम कहते हैं।

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