अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट बनाने से पहले महंत नृत्यगोपालदास की सुरक्षा बढ़ी, जेड प्लस में रहेंगे

अयोध्या से बड़ी खबर है। राम मंदिर ट्रस्ट बनने से पहले ही श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। महंत नृत्यगोपाल दास को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें राममंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

बता दें कि श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष पद व न्यास में शामिल होने के लिए अयोध्या के शीर्ष संत-धर्माचार्यों की लड़ाई सतह पर आ चुकी है। महंत नृत्यगोपाल दास के बाद निर्मोही अखाड़ा ने भी ट्रस्ट में न सिर्फ शामिल होने बल्कि अध्यक्ष या सचिव पद की मांग करके हलचल मचा दी थी।

रामनगरी के संत-महंत दुविधा में हैं कि दोनों प्रमुख आश्रमों में किसका पक्ष लें और किसका नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को विराजमान रामलला के पक्ष में फैसला देते हुए केंद्र सरकार से मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या एक्ट 1993 के तहत राममंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट की योजना और शर्तें तय करने को कहा था। साथ ही मस्जिद के लिए सरकार से अयोध्या में ही प्रमुख जगह पर पांच एकड़ भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के निर्देश दिए थे। हालांकि ट्रस्ट का स्वरूप क्या होगा? इसे लेकर न पक्षकारों के पास कोई जानकारी है, न जिला प्रशासन के पास।

सूत्र सिर्फ इतना बताते हैं कि मामला गृहमंत्रालय के बजाय अब पीएमओ देख रहा है। फिर भी यहां राममंदिर निर्माण के लिए तीन ट्रस्ट श्रीरामजन्मभूमि न्यास, श्रीरामजन्मभूमि रामालय न्यास और श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास में दावेदारी गरमाई हुई है। जबकि श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा था कि हमारी अध्यक्षता में राममंदिर बनेगा, जिसको शामिल होना होगा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कुछ लोग ट्रस्ट में आ जाएंगे। नया ट्रस्ट बनाने की कोई जरूरत नहीं है। इन दो बड़े मठों की लड़ाई में यहां का आम साधु-संत अब परेशान दिख रहा है।

ट्रस्ट पर लोगों की मांग, शीर्ष संत हों शामिल, पारदर्शी व्यवस्था दे सरकार

राममंदिर का नया ट्रस्ट कैसा हो, इसे लेकर जानकारों की राय लगभग एक जैसी है। सब चाहते हैं कि ट्रस्ट में न सिर्फ अयोध्या के बल्कि विश्व के दिग्गज संत-धर्माचार्य शामिल होने चाहिए। ट्रस्ट की व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए, इसके लिए जरूरी है कि प्रबंधन के साथ एक-एक पाई का हिसाब के लिए सरकारी तंत्र विकसित हो। ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालु को एक कप चाय से लेकर शिक्षा-स्वास्थ्य आदि सारा इंतजाम संचालित हो।

तिरुपति बालाजी ट्रस्ट जैसा हो राममंदिर ट्रस्ट का मॉडल
निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत लाल वर्मा कहते हैं कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर अब पीएमओ को ट्रस्ट की योजना बनानी है। इसमें रामानंदीय वैरागी संप्रदाय के 80 प्रतिशत सदस्य होने चाहिए। बाकी अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी व समाजसेवी हों। यह अनिवार्य हो कि वे वैष्णव हों, और मूर्तिपूजा करते हों। रंजीत लाल वर्मा ने कहा कि ट्रस्ट की जनरल बाड़ी के अलावा प्रबंध कार्यकारिणी में निर्मोही अखाड़े का वर्चस्व होना चाहिए।

इसका अध्यक्ष व सचिव समेत 7 या 11 की कार्यकारिणी में सभी पंचों को स्थान मिलना चाहिए। सारा हिसाब-किताब पारदर्शी होना चाहिए। वे कहते हैं कि सरकार को न ट्रस्ट में शामिल होने का अधिकार है न धन खर्च करने का। इसके लिए तिरुपति बालाजी ट्रस्ट का मॉडल अपनाया जा सकता है।

Related Articles