आजम खां के खिलाफ बन सकता है विशेषाधिकार प्रस्ताव, जानें इसके बारे में

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां समय से महिलाओं पर अभद्र तरह से टिप्पणी करने को लेकर विवादों में लगातार बने हुए हैं। उन्होंने गुरुवार को भी भाजपा सांसद और लोकसभा की पीठासीन अधिकारी रमा देवी पर अभद्र टिप्पणी की। शुक्रवार को उनकी इसी टिप्पणी पर लोकसभा में काफी हंगामा हुआ। स्पीकर ओम बिड़ला और विपक्ष ने सदन में आजम के माफीनामे की मंजूरी दे दी है। अगर ऐसा नहीं होता तो आजम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया जा सकता है।

क्या है विशेषाधिकार हनन और प्रस्ताव की प्रक्रिया, आजम खां पर लगेगी

  • सदन का कोई भी सदस्य अध्यक्ष की अनुमति से किसी दूसरे सदस्य के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव ला सकता है। जो सदस्य विशेषाधिकार का प्रश्न उठाता है, उसे उसकी लिखित सूचना लोकसभा महासचिव को देनी होती है।
  • अब लोकसभा अध्यक्ष पर निर्भर करता है कि वह इसकी अनुमति देंगे या नहीं। अगर उन्हें प्रस्ताव नियमों के तहत नहीं लगता, तो वो इसे खारिज कर सकते हैं। अगर अनुकूल लगता है तो अनुमति दे सकते हैं।
  • अब इसपर आपत्ति आती है। जिसके लिए सदन में कम से कम 25 सदस्यों को खड़े होकर आपत्ति जतानी होती है। ऐसा ना होने पर प्रस्ताव को जांच पड़ताल के लिए विशेषाधिकार समिति को भेज दिया जाता है।
  • लोकसभा की विशेषाधिकार समिति में 15 सदस्य होते हैं और इसका अध्यक्ष सत्ताधारी पार्टी का सांसद होता है। हालांकि समिति में सभी पार्टियों के सांसद शामिल होते हैं। इस समिति का काम प्रस्ताव की जांच पड़ताल करना होता है।
  • जांच पड़ताल के बाद समिति अपनी सिफारिशें देती है और सिफारिशों पर सदन में बहस भी होती है।

मुंबई में तेज बारिश के कारण ट्रेन में फंसे दो हजार से ज्यादा यात्री

दंड का भी है प्रकरण

अगर कोई व्यक्ति या फिर संस्थान विशेषाधिकार के हनन या सदन की अवमानना का दोषी पाया जाता है तो वो सदन पर निर्भर करता है कि वह उसे माफ करे, चेतावनी देकर छोड़ दे या फिर जेल भेज दे। साल 1967 में दो व्यक्तियों को राज्यसभा की विजिटर गैलरी से पैम्पलेट फेंकने के कारण जेल भेज दिया गया था।

अपने कर्तव्यों का स्वतंत्र और प्रभावी तरीके से पालन करने के लिए संसद सदस्यों और समितियों को कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं। अगर कोई संसद का सदस्य या फिर कोई बाहरी संस्था या व्यक्ति इन अधिकारों का हनन करते हैं तो उसे सदन की अवमानना और विशेषाधिकार का हनन माना जाता है। ऐसे में सदन का कोई सदस्य उस व्यक्ति के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव ला सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबित आजम खान की टिप्पणी सदन की अवमानना और विशेषाधिकार के हनन का मामला बनता है। इसमें समिति सांसद के बारे में फैसला करती है और साथ ही उस फैसले से सदन को भी अवगत कराती है। फिर सदन समिति के निर्णय पर मुहर लगाता है। अगर कोई विशेषाधिकार के हनन का दोषी पाया जाता है तो उस सांसद को निलंबित किया जा सकता है और साथ ही सदन से बहिष्कृत भी किया जा सकता है।इसी कानून के कारण साल 1978 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को विशेषाधितार हनन से जुड़े मामले में लोकसभा से निष्कासित कर जेल भेज दिया गया था। चलिए जानते हैं क्या हैं विशेषाधिकार से जुड़े नियम।

Related Articles