Bajrang Punia ने ईरान के पहलवान को दी मात, सेमीफाइनल में पहुंचे, पिता ने कहीं ये बात

टोक्यो ओलंपिक में पहलवान बजरंग पुनिया पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल 1/8 फाइनल मैच में किर्गिस्तान के ई अकमातालिव से जीत कर क्वार्टर फाइनल में पहुंचे है

टोक्यो: टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में पहलवान बजरंग पुनिया (Wrestler Bajrang Punia) पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल 1/8 फाइनल मैच में किर्गिस्तान के ई अकमातालिव से जीत कर क्वार्टर फाइनल में पहुंचे है।माकुहारी मेसे हॉल-A, मैट-A पर हुए क्वार्टर फाइनल मैच में बजरंग ने ईरान (Iran) के मुतर्जा घियासी चेका को 2-1 से हराया। टोक्यो में भारत के लिए पदक के दावेदार बजरंग को विक्ट्री बाई फॉल के आधार पर जीत मिली।

पहले पीरियड की समाप्ति के बाद एशियाई खेल चैम्पियन बजरंग 0-1 से पीछे थे लेकिन दूसरे क्वार्टर में 2 अंक लेकर वह 2-1 से आगे हो गए। अंतिम एक मिनट में बजरंग ने अपना दांव खेला और ईरानी पहलवान को चित्त कर दिया। इसी के साथ उनकी जीत हो गई।

बजरंग के माता-पिता खुश

पहलवान बजरंग पुनिया के क्वार्टर फाइनल पहुंचने पर उनके परिवार खुश हैं। बजरंग पुनिया के पिता ने कहा, बहुत खुश हैं, उसने देश के लिए परचम लहराया। भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वो गोल्ड मेडल लाए। बजरंग की माता ने कहा, हमारे बेटे ने अच्छा खेला और वो देश के लिए बहुत मेडल लेकर आएगा।

बजरंग पुनिया भारत के एक फ्रीस्टाइल पहलवान हैं। वह 65 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 3 पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय पहलवान हैं।

बजरंग पुनिया का जन्म भारत के हरियाणा राज्य में झज्जर जिले के खुदान गांव में जाट परिवार में हुआ था। उन्होंने 7 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की और उनके पिता ने उन्हें इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। बजरंग ग्रामीण भारत, देश के एक गरीब हिस्से में पले-बढ़े हैं। उनके परिवार के पास पारंपरिक खेलों के लिए पैसे नहीं थे। इसके बजाय, उन्हें कुश्ती और कबड्डी जैसे मुफ्त खेलों में भाग लेना पड़ा। पुनिया के पिता भी एक पहलवान थे और छोटी उम्र में ही उनके परिवार ने उन्हें एक स्थानीय मिट्टी कुश्ती स्कूल में शुरू किया था। कुश्ती अभ्यास में जाने के लिए पुनिया ने स्कूल छोड़ना शुरू कर दिया। 2015 में उनका परिवार सोनीपत चला गया ताकि वह भारतीय खेल प्राधिकरण के एक क्षेत्रीय केंद्र में भाग ले सकें।

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