Bakrid 2021 : पढ़ें आखिर ईद-अल-अजहा को क्यों कहा जाता है ‘बकरीद’, ऐसे कहें अपनों को Eid Mubarak

Lucknow: Bakrid 2021 इस साल हम फिर से कोरोना कल में एक पाक त्योहार ईद मनाने जा रहे हैं। बुधवार को देश ईद-अल-अजहा मनाएगा। इसे बकरीद भी कहंते हैं बकरीद यानी कुर्बानी की ईद। से ईद-अल-अजहा भी कहा गया है। ये ऐसा पर्व है जो अपने फर्ज के लिए कुर्बानी की भावना सिखाता है। जानें इस पर्व से जुड़ी कई ऐसी बातें, जो शायद ही आपको पता हों।

ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का इतिहास

Bakrid 2021 बताया जाता है कि हजरत इब्राहिम को अल्लाह ‘खुदा’ ने आजमाइश का हुक्म दिया था। उन्हें ये हुक्म मिला कि वो अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देनी होगी। हजरत इस हुक्म के बाद मुश्किल में पड़ गए। वो इस सोच में पड़ गए कि आखिर उन्हें सबसे ज्यादा प्यार किस्से है, जिसे वे कुर्बान करें। तभी उन्हें अपने बेटे हजरत इस्माइल का ख्याल आया। उन्होंने सोच लिया कि वे बेटे को ही कुर्बान करेंगे क्योंकि वे उससे बहुत प्यार करते थे। वे अपने बेटे को कुर्बान करने निकल पड़े। उन्होंने आंखों पर पट्टी बांधी जिससे कुर्बानी के समय उनके हाथ रुक न जाएं और बेटे की कुर्बानी दे दी। पर जब उन्होंने पट्टी उतारी तो देखा कि उनके बेटे सही-सलामत थे। रेत पर एक भेड़ कटा पड़ा था। कहते हैं कि अल्लाह ने उनकी कुर्बानी की भावना से खुश होकर बेटे को जीवनदान दिया था। तभी से जानवरों की कुर्बानी को अल्लाह का हुक्म माना गया और बकरीद का पर्व मनाया जाने लगा।

Bakrid 2021 ऐसे कहें अपनों को Eid Mubarak

बता दें ईद-अल-अजहा यानि बकरीद के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर नहाकर नए कपड़े पहनते हैं। ईदगाह में ईद की नमाज अदा करते हैं। नमाज के बाद एक-दूसरे से गले मिलते हैं। ईद की मुबारकबाद देते हैं। फिर जानवरों की कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो जाता है।

ये भी पढ़ें :  पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तबीयत नाजुक, एसजीपीजीआई ने जारी की मेडिकल बुलेटिन

(Puridunia हिन्दी, अंग्रेज़ी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)

Related Articles