नए नियमों के साथ ‘जल्‍लीकट्टू’ की घर वापसी

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नई दिल्‍ली। तमिलनाडु का परंपरागत खेल जल्लीकट्टू इस बार पोंगल पर खेला जाएगा। बिगडै़ल सांड़ों को काबू में करने वाला खेल जानलेवा होता है। इस खेल पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन तमिलनाडु सरकार और तमाम किसान संगठनों के दबाव में आकर केन्‍द्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय ने इस खेल को दोबारा मंजूरी दे दी है।

तमिलनाडु में जल्लीकट्टू एक लोकप्रिय खेल रहा है। हालांकि पशुप्रेमी संगठन इस खेल का विरोध करते रहे हैं। तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसे देखते हुए ये फ़ैसला अहम माना जा रहा है। तमिलनाडु सरकार के अलावा कई किसान संगठनों ने भी मांग की थी कि केंद्र सरकार क़ानून में बदलाव करे।

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केन्‍द्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक़, जल्लीकट्टू के तहत सांड या बैलों को 15 मीटर के दायरे में ही काबू करना होगा। महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल और गुजरात में परंपरागत बैलगाड़ी दौड़ भी हो सकती है। बशर्तें यह दौड़ एक विशेष ट्रैक पर आयोजित की जाए। यह ट्रैक दो किलोमीटर से ज़्यादा लंबा नहीं होना चाहिए।

तमिलनाडु में जनवरी के महीने में फसल कटाई के त्योहार पोंगल पर जल्लीकट्टू का आयोजन किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2014 में केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को सही ठहराया था, जिसमें जल्लीकट्टू पर बैन लगाया गया था। ल‍ेकिन चुनावी माहौल ने सरकार को अपनी ही अधिसूचना वापस लेने पर मजबूर कर दिया है।

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जानिए क्‍या है जल्‍लीकट्टू

  1. तमिलनाडु में मकर संक्रांति का पर्व पोंगल के रूप में मनाया जाता है। इस खास बैल दौड़ का आयोजन पोंगल के मौके पर किया जाता है।
  2. बैलों की लड़ाई के खेल को जल्लीकट्टू के नाम से जाना जाता है।
  3. पोंगल पर कई प्रथाएं प्रचलित हैं उन्हीं में से एक है जल्लीकट्टू प्रथा
  4. भले ही विदेशों में बुल फाइट का आयोजन एक प्रतिस्पर्धा के तौर किया जाता है, लेकिन हमारे देश में यह धार्मिक परंपरा का एक रूप है।
  5. पोंगल के त्योहार में मुख्य रूप से बैल की पूजा की जाती है क्योंकि बैल के माध्यम से किसान अपनी जमीन जोतता है। इसी के चलते बैल दौड़ का आयोजन किया जाता है।
  6. चेन्नई के दक्षिण में 575 किमी दूर पालामेडू में पोंगल के मौके पर ऐसा ही खेल खेला गया। इस समारोह को जल्लीकट्टू प्रथा नाम से जानते हैं।
  7. सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और महाराष्ट्र में होने वाले जल्लीकट्टू और देश के दूसरे हिस्सों में आयोजित होने वाली बैलगाड़ी दौड़ पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
  8. अदालत ने ऐसे आयोजनों को जानवरों के प्रति क्रूरता करार देते हुए टिप्पणी की कि पशुओं को भी सम्मान के साथ जीने का हक है। इसके साथ ही कोर्ट ने कुछ नियम शर्तों के साथ जल्लीकट्टू को मंजूरी देने वाला तमिलनाडु का कानून निरस्त कर दिया था।
  9. वर्ष 2011 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पशु कल्याण विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी करके पशुओं पर क्रूरता रोकथाम कानून 1960 के उपबंध 22 के तहत बैलों के प्रदर्शन केंद्रित कार्यों में इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी थी। अब सरकार ने नया नोटिफिकेशन जारी कर इस खेल से पाबंदी हटा दी है।

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