भारत के बड़े व्यवसाय में बांग्लादेश ने लगाई सेंध, 2100 करोड़ के विदेशी ग्राहक छीने

भारत के बड़े व्यवसाय में पडोसी देश बांग्लादेश ने लगाई सेंध, 2100 करोड़ के विदेशी ग्राहक छीने

कानपुर: भारत में उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर के एक व्यवसाय ने आज बांग्लादेश को सशक्त बना दिया है। ये सुनकर आपको थोड़ा असहज महसूस हो सकते है, लेकिन ये सही है। पड़ोसी देश बांग्लादेश की सूरत और सीरत कानपूर के चमड़ा और टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने पूरी तरह बदल दी है। कानपूर की ये इंडस्ट्री लमसे समय से परेशान थी पर बांग्लादेश ने इसमें सेंध लगा दी है। सेंध ही नहीं पडोसी देश ने भारत से लगभग 2100 करोड़ की विदेशी बिजिनेस को भी बांग्लादेश बुला लिया है।

एनजीटी के सख्ती से हुआ नुक्सान

सॉफ्ट चमड़ा मतलब बकरे या बकरी की खाल का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट भारत के बाद बांग्लादेश ही था। माघ मेला, कुंभ, प्रदूषण, कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट और एनजीटी के सख्ती के कारण 2.5 साल में टेनरियां अधिकतम 50% क्षमता से चल रही हैं। उसमें भी ये 19 महीने बंद रहीं। ऐसे में एक्सपोर्ट के ऑर्डर बहुत काम मिले या समझे न के बराबर थे। इस स्थिति में यूरोप के कस्टमरों ने बांग्लादेश का रुख किया तो वहां जमकर उन्हें इसके लिए जबरदस्त पैकेज भी दिए गए। ड्यूटी ड्रॉ बैक 15 फीसदी कर दिया। इसका असर यह हुआ कि कानपुर के हाथ से चार बड़े विदेशी ब्रांड चले गए। जो टेनरियां यहां विस्तार करने की योजना बना चुकी थीं, उनमें से 32 ने पश्चिम बंगाल में जमीन के लिए एमओयू कर लिया।

बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय बढ़ी

रीजनल चेयरमैन सीएलई जावेद इकबाल कानपुर में लेदर कारोबारी हैं। उनके मुताबिक कानपुर के चार टेनर्स बांग्लादेश में व्यवसाय करने चले गए। मौजूदा समय में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय बढ़ गई है। भारत में पिछले 2.5 वर्षों से टेनरी उद्योग संकट में है। इस वजह से लेदर निर्यात में 40 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। इसके बडे हिस्से में बांग्ला देश ने सेंध लगा दी।

टेनरियां महीने में 15 दिन चल रहीं

वहीँ यूपी स्माल टेनर्स एसोसिएशन के डॉ. फिरोज आलम का कहना है लेदर एक्सपोर्ट पर ड्रॉ बैक अब घटकर दो प्रतिशत रह गया है। टेनरियां महीने में 15 दिन चल रही हैं। इन वजह से हमारी लागत बढ़ गई है और बांग्लादेश की 20 फीसदी तक कम हो गई है।

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