नहीं रहे उत्‍तराखंड की शान लोक गायक बांके लाल

banke lal
बांके लाल का फाइल फोटो

उत्‍तरकाशी। लोक गायक बांके लाल का लंबी बीमारी के बाद पैतृक गांव थाती में निधन हो गया। लंबे समय से उनकी आर्थिक स्थति ठीक नहीं थी। वह और उनके परिजन स्‍थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे थे। लेकिन उनकी मदद किसी ने नहीं की।

कभी अपने जागरों के जरिए लोगों की नजरों में चढ़े प्रसिद्ध जागर गायक बांके लाल लंबे समय से लोगों को नजर नहीं आ रहे थे। अस्थमा से पीड़ित बांके लाल का का हाल कोई पूछने वाला नहीं था। उत्तरकाशी के डुंडा ब्लॉक के थाती धनारी गांव निवासी 76 वर्षीय बांके लाल दो साल से अस्थमा से पीड़ित थे मगर आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनका इलाज सही से नहीं हो पा रहा था। दो सप्‍ताह पहले उनकी तबियत बिगड़ने पर उनकी बेटी संगीता और पत्‍‌नी बचन देई ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उनके नजीबाबाद से करीब 150 से अधिक कार्यक्रम प्रसारित हो चुके हैं।

माघ मेले की रौनक रहा करते थे बांके लाल

बांके लाल ने उत्तरकाशी से लेकर दिल्ली समेत अन्य स्थानों पर अपनी प्रस्तुति दी। उत्तरकाशी के प्रसिद्ध माघ मेले के पहले दिन उनके जागर सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रहती थी। इस दौरान वे कई पारंपरिक वाद्य यंत्र खुद ही बजाते थे।

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