घर बैठे मोबाइल पर मिले नौकरी तो रहे सावधान, लिंक पर क्लिक करते ही गायब होगी रकम

लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ में बेरोजगारों को रोजगार का सपना दिखा कर उन्हें शिकार बनाने वाले कॉल सेंटर का अलीगंज पुलिस व क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है। बेरोजगार युवाओं को फोन पर अच्छी नौकरी का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। फिर लिंक शेयर करके उनके खाते से रकम उड़ा देते थे। अलीगंज पुलिस व क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को कॉल सेंटर पर छापेमारी करके नौ युवतियों समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कॉल सेंटर का संचालक चार साल में विभिन्न राज्यों के हजारों युवाओं को शिकार बना चुका है।

पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर छापेमारी

लखनऊ पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर को जब इस मामले में शिकायत मिली तो तुरंत डीसीपी (क्राइम) पीके तिवारी व डीसीपी (उत्तरी) देवेश कुमार पांडेय को इस मामले जल्द कार्रवाई करने के निर्देश मिले। एक्शन में आई पुलिस ने छानबीन की तो सोमवार की रात को अलीगंज पुलिस व क्राइम ब्रांच टीम ने पुरनिया में पेट्रोल पंप के पीछे कैलाश प्लाजा में चल रहे कॉल सेंटर पर छापा मारा। वहां से नौ युवतियों समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

ये हुआ बरामद

कॉल सेंटर से 17 मोबाइल, 12 कंप्यूटर, एक प्रिंटर, एक लैपटॉप, एक एलईडी टीवी, दो डिश के सेट टॉप बॉक्स, एक डिजिटल कार्डलेस फोन, वाईफाई सेट टॉप बॉक्स, लेटर पैड, मोहर व चार पेन ड्राइव बरामद हुए है।

11 गिरफ्तार

अलीगंज इंस्पेक्टर ने बताया कि पकड़े गए लोगों में संचालक अनुज कुमार पाल व उसकी पत्नी डॉली उर्फ रूबी, अजय कश्यप, रमा सिंह, कोमल सिंह, जया निगम, रुचि तिवारी, सदफ खान, पूजा चौरसिया, प्रीति व पल्लवी शामिल हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि अनुज कुमार पाल व अजय कश्यप को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया जबकि युवतियाें को थाने से जमानत पर रिहा कर दिया गया।

इस तरह उड़ाते थे रकम

एडीसीपी (उत्तरी) प्राची सिंह ने बताया कि अनुज व उसकी पत्नी पुरनिया में मार्च 2021 से ये कॉल सेंटर चला कर रहे थे। वह वर्ष 2017 से इस तरह की ठगी कर रहा है। कॉल सेंटर के संचालक नौकरी डॉट कॉम समेत अन्य जॉब पोर्टल पर रजिस्टर्ड बेरोजगार युवाओं का डाटा निकालते थे। इसके बाद उनसे संपर्क करके अच्छी कंपनी में नौकरी का ऑफर देकर रजिस्ट्रेशन करवाते थे। भरोसे के लिए कंपनी की लाइव लोकेशन भेजते थे और अपना लिंक शेयर करते थे। उसे क्लिक करते ही उनका मोबाइल हैक करते थे। फिर उनके खाते से पूरी रकम अपने यूके वॉलेट या फिर पेटीएम में ट्रांसफर कर लेते थे।

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